नर्मदा परियोजना विवाद पर चार राज्यों में ऐतिहासिक समझौता, वर्षों पुराना भुगतान विवाद खत्म

नर्मदा परियोजना विवाद पर चार राज्यों में ऐतिहासिक समझौता, वर्षों पुराना भुगतान विवाद खत्म

देश में अंतरराज्यीय जल परियोजनाओं से जुड़े लंबे समय से लंबित विवादों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र ने 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्णय से जुड़े सरदार सरोवर और इंदिरा सागर परियोजनाओं के लागत बंटवारे तथा लंबित भुगतान संबंधी मुद्दों के अंतिम निपटारे के लिए किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल तथा चारों राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित रहे। यह समझौता सहकारी संघवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण की भूमिका

नर्मदा नदी से जुड़े राज्यों के बीच जल बंटवारे और परियोजनाओं को लेकर उत्पन्न विवादों के समाधान के लिए नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन अंतरराज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत किया गया था। न्यायाधिकरण ने जल आवंटन, बांध निर्माण, परियोजनाओं की लागत और राज्यों की वित्तीय जिम्मेदारियों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपना निर्णय दिया। इसी निर्णय के आधार पर विभिन्न राज्यों के बीच वित्तीय दायित्व तय किए गए थे।

सरदार सरोवर और इंदिरा सागर परियोजनाओं का महत्व

सरदार सरोवर परियोजना गुजरात में नर्मदा नदी पर स्थित देश की सबसे प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। इसके माध्यम से सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। वहीं, मध्य प्रदेश स्थित इंदिरा सागर परियोजना विशाल जलाशय और जलविद्युत उत्पादन के लिए जानी जाती है। दोनों परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, पुनर्स्थापन और लागत साझेदारी जैसी अंतरराज्यीय जिम्मेदारियां शामिल हैं।

समझौते में क्या तय हुआ

समझौते के तहत पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) पर हुए खर्च, डूब क्षेत्र की भूमि के मुआवजे तथा निर्माण कार्यों के लिए लिए गए ऋण पर ब्याज जैसी लंबित देनदारियों का अंतिम समाधान किया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार राज्य पर लगभग 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये के दावों को समाप्त कर दिया गया है और महाराष्ट्र केवल 27 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। इस एकमुश्त समझौते से वर्षों से चले आ रहे वित्तीय विवाद का पटाक्षेप हो गया है।

अंतरराज्यीय सहयोग की नई मिसाल

हाल के समय में विभिन्न राज्यों के बीच जल परियोजनाओं को लेकर सहयोग बढ़ा है। नर्मदा समझौते से पहले राजस्थान-हरियाणा के बीच यमुना जल परियोजना तथा किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से जुड़े समझौते भी हुए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समझौते देश में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करेंगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नर्मदा नदी मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से होकर बहती है तथा अंत में अरब सागर में मिलती है।
  • सरदार सरोवर परियोजना भारत की सबसे प्रसिद्ध बहुउद्देशीय अंतरराज्यीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है।
  • बड़े बांधों से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन को आर एंड आर (Resettlement and Rehabilitation) कहा जाता है।
  • भारत में अंतरराज्यीय जल विवादों का निपटारा अंतरराज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत किया जाता है।

चार राज्यों के बीच हुआ यह समझौता केवल एक वित्तीय विवाद का समाधान नहीं है, बल्कि जल संसाधनों के बेहतर उपयोग, राज्यों के बीच विश्वास और सहकारी संघवाद को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे भविष्य में अन्य लंबित जल विवादों के समाधान का मार्ग भी अधिक सहज होने की उम्मीद है।

Originally written on July 8, 2026 and last modified on July 8, 2026.

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