उच्च समुद्री मत्स्यन के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण पत्र कार्यक्रम का शुभारंभ
भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 9 जुलाई 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर में उच्च समुद्री मत्स्यन के सतत दोहन के लिए प्राधिकरण पत्र (Letter of Authorisation- LoA) जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन दस्तावेज (2026-2036) का भी लोकार्पण किया। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग द्वारा किया गया। इस पहल का उद्देश्य भारतीय मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए उच्च समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षित, पारदर्शी और सतत मत्स्यन व्यवस्था विकसित करना है।
प्राधिकरण पत्र (LoA) क्या है?
प्राधिकरण पत्र (Letter of Authorisation) भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा उच्च समुद्री मत्स्यन के सतत दोहन संबंधी दिशा-निर्देश, 2025 के तहत अनिवार्य प्रावधान है। यह अनुमति पत्र प्रत्येक जहाज के लिए अलग-अलग जारी किया जाता है और इसे किसी अन्य जहाज को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। इसे रीयलक्राफ्ट (ReALCraft) फिशिंग वेसल रजिस्ट्रेशन पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे उच्च समुद्र में संचालित होने वाले जहाजों का डिजिटल पंजीकरण, निगरानी और सत्यापन सुनिश्चित किया जा सके।
उच्च समुद्री मत्स्यन का ढांचा
उच्च समुद्री मत्स्यन (High Seas Fisheries) से तात्पर्य उन समुद्री क्षेत्रों में मछली पकड़ने की गतिविधियों से है, जो किसी भी तटीय देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone-EEZ) से बाहर स्थित होते हैं। भारत ने उच्च समुद्री मत्स्यन के लिए डिजिटल आवेदन, ऑनलाइन सत्यापन और निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुमति जारी करने की व्यवस्था विकसित की है। इससे समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करने के साथ-साथ अवैध और अनियंत्रित मत्स्यन पर भी नियंत्रण रखने में सहायता मिलेगी।
सहकारी संस्थाओं और मछुआरों की भागीदारी
इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मत्स्य सहकारी समितियों, मछली पकड़ने वाले जहाजों के मालिकों तथा नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCEL) को प्राधिकरण पत्र वितरित किए गए। यह पहल फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FFPOs) और मत्स्य सहकारी समितियों को गहरे समुद्र और उच्च समुद्री मत्स्यन में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे मछुआरों की आय बढ़ाने, निर्यात को प्रोत्साहन देने और समुद्री संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन
कार्यक्रम के दौरान जारी ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन दस्तावेज (2026-2036) राज्य में गहरे समुद्र में मत्स्यन के विकास की दीर्घकालिक योजना प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य उच्च मूल्य वाले समुद्री संसाधनों तक नियंत्रित और सतत पहुंच सुनिश्चित करना, आधुनिक मत्स्यन तकनीकों को बढ़ावा देना तथा मत्स्य क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- किसी तटीय देश का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) सामान्यतः आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक विस्तृत होता है।
- भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने के जहाज राष्ट्रीय नियमों के तहत पंजीकरण, निगरानी और प्राधिकरण प्रणाली के अंतर्गत संचालित होते हैं।
- रीयलक्राफ्ट (ReALCraft) फिशिंग वेसल रजिस्ट्रेशन पोर्टल का उपयोग मछली पकड़ने वाले जहाजों के डिजिटल पंजीकरण और ट्रैसेबिलिटी के लिए किया जाता है।
- मत्स्य सहकारी समितियां और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FFPOs) भारत के मत्स्य क्षेत्र में संस्थागत विकास के प्रमुख माध्यम हैं।
उच्च समुद्री मत्स्यन के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण पत्र कार्यक्रम और ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन भारत के मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और सतत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इन योजनाओं से समुद्री संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग बढ़ेगा, मछुआरों की आय में वृद्धि होगी और भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।