गुजरात में बन रहे पहले एयर-फिल्ड रबर डैम, जल संरक्षण और सिंचाई को मिलेगा नया आधार
गुजरात सरकार राज्य के पहले दो एयर-फिल्ड रबर डैम का निर्माण कर रही है। ये परियोजनाएं छोटा उदयपुर जिले की हेरन नदी और तापी जिले की अंबिका नदी पर विकसित की जा रही हैं। दक्षिण कोरिया की आधुनिक तकनीक पर आधारित इन डैमों का उद्देश्य जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और बाढ़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। यह परियोजना केंद्र सरकार के ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
क्या होता है एयर-फिल्ड रबर डैम?
एयर-फिल्ड रबर डैम, जिसे इन्फ्लेटेबल डैम भी कहा जाता है, एक लचीली जल संरचना होती है। इसमें नदी या नहर के तल पर विशेष प्रकार का रबर ब्लैडर लगाया जाता है, जिसे आवश्यकता के अनुसार हवा या पानी से फुलाया और खाली किया जा सकता है। सामान्य परिस्थितियों में यह पानी का स्तर बढ़ाकर जल भंडारण करता है, जबकि भारी वर्षा या बाढ़ के समय इसे खाली कर दिया जाता है, जिससे अतिरिक्त पानी और गाद आसानी से नदी के प्रवाह के साथ आगे निकल जाती है। इससे बाढ़ का खतरा कम होता है और नदी का प्राकृतिक प्रवाह भी बना रहता है।
परियोजना की लागत और वर्तमान स्थिति
राज्य में पहला राजवसाना रबर डैम छोटा उदयपुर जिले के राजवसाना गांव में बनाया जा रहा है, जबकि दूसरा पाठकवाड़ी रबर डैम तापी जिले के पाठकवाड़ी गांव में निर्माणाधीन है। दोनों परियोजनाओं की कुल लागत 162 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें राजवसाना परियोजना पर लगभग 82.97 करोड़ रुपये तथा पाठकवाड़ी परियोजना पर 79.13 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया जा रहा है। 6 जुलाई 2026 तक राजवसाना रबर डैम का लगभग 75 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है और इसके सितंबर 2027 तक शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना 25 गांवों की लगभग 3,420 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी। वहीं पाठकवाड़ी रबर डैम का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इससे लगभग 650 हेक्टेयर कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई उपलब्ध होगी।
आधुनिक तकनीक और विशेषताएं
इन दोनों डैमों में दक्षिण कोरिया से आयातित विशेष रूप से तैयार रबर ब्लैडर का उपयोग किया जा रहा है। इसकी मोटाई 18 से 32 मिलीमीटर के बीच है और इसे 50 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान सहन करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी अनुमानित आयु लगभग 30 वर्ष है। डैमों में एससीएडीए (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) आधारित स्वचालित प्रणाली लगाई गई है, जो आवश्यकता के अनुसार रबर ब्लैडर को फुलाने और खाली करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करती है। इससे जल प्रबंधन अधिक सटीक और प्रभावी बनता है।
जल संरक्षण और बाढ़ प्रबंधन में भूमिका
एयर-फिल्ड रबर डैम वर्षा के पानी को संरक्षित करने, सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराने तथा बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मानसून के दौरान जब नदी में जल प्रवाह बढ़ता है, तब रबर ब्लैडर को खाली कर दिया जाता है, जिससे अतिरिक्त पानी और गाद बिना किसी अवरोध के आगे बढ़ जाती है। इस तकनीक से जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन दोनों को लाभ मिलता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एससीएडीए (SCADA) का पूरा नाम सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन है, जिसका उपयोग स्वचालित निगरानी एवं नियंत्रण प्रणाली में किया जाता है।
- एयर-फिल्ड रबर डैम को इन्फ्लेटेबल डैम भी कहा जाता है।
- ‘कैच द रेन’ अभियान का उद्देश्य वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।
- दक्षिण कोरिया जल अवसंरचना परियोजनाओं में उपयोग होने वाली विशेष औद्योगिक रबर तकनीक के लिए विश्वभर में जाना जाता है।
गुजरात के ये पहले एयर-फिल्ड रबर डैम राज्य में आधुनिक जल प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकते हैं। इनसे कृषि क्षेत्र को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और बाढ़ प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा। भविष्य में ऐसी तकनीकों का विस्तार देश के अन्य जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।