आस्था वन संरक्षण योजना: 15,000 पवित्र उपवनों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार की ₹3,000 करोड़ की पहल

आस्था वन संरक्षण योजना: 15,000 पवित्र उपवनों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार की ₹3,000 करोड़ की पहल

भारत की पारंपरिक पर्यावरणीय विरासत को संरक्षित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2026 को आस्था वन संरक्षण योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत देशभर में स्थित लगभग 15,000 पवित्र उपवनों (सेक्रेड ग्रोव्स) का संरक्षण और पुनर्स्थापन किया जाएगा। योजना के लिए ₹3,000 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है और इसका क्रियान्वयन 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों में किया जाएगा। इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता राष्ट्रीय कैम्पा (CAMPA) फंड से प्रदान की जाएगी, जिससे पारंपरिक वन क्षेत्रों के संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा।

आस्था वन क्या हैं और इनका महत्व

आस्था वन, जिन्हें पवित्र उपवन भी कहा जाता है, ऐसे वन क्षेत्र हैं जिन्हें स्थानीय समुदाय धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के आधार पर सदियों से संरक्षित करते आए हैं। इन क्षेत्रों में वृक्षों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर सामाजिक प्रतिबंध होते हैं, जिससे प्राकृतिक पारिस्थितिकी संतुलित बनी रहती है। भारत के विभिन्न राज्यों में ऐसे उपवन स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल माने जाते हैं।

कैम्पा फंड और वन पुनर्स्थापन कार्यक्रम

आस्था वन संरक्षण योजना को कोयंबटूर में आयोजित राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) की सातवीं संचालन परिषद की बैठक में मंजूरी दी गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। योजना के साथ-साथ भूमि क्षरण को कम करने और जैव विविधता के संरक्षण के लिए व्यापक लैंडस्केप रेस्टोरेशन प्रोग्राम को भी स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का सतत संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद बनी योजना

आस्था वन संरक्षण योजना की मंजूरी 18 दिसंबर 2024 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण निर्देश के बाद दी गई। राजस्थान से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केंद्र सरकार को देशभर के पवित्र उपवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा था। इसी निर्देश के अनुरूप राष्ट्रीय कैम्पा फंड के अंतर्गत इस संरक्षण योजना को तैयार किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण में पवित्र उपवनों की भूमिका

पवित्र उपवन केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये क्षेत्र जैव विविधता के संरक्षण, मिट्टी के कटाव को रोकने, वर्षा जल के संरक्षण तथा स्थानीय जल स्रोतों को बनाए रखने में अहम योगदान देते हैं। पर्यावरण विज्ञान, संरक्षण जीवविज्ञान और पर्यावरणीय शासन के अध्ययन में भी इनका विशेष महत्व माना जाता है। इन उपवनों का संरक्षण पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक पर्यावरणीय नीतियों के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आस्था वन संरक्षण योजना के लिए केंद्र सरकार ने ₹3,000 करोड़ की मंजूरी दी है।
  • योजना के तहत देशभर के लगभग 15,000 पवित्र उपवनों का संरक्षण और पुनर्स्थापन किया जाएगा।
  • योजना का कार्यान्वयन 2026-27 से 2030-31 तक कुल पांच वर्षों में किया जाएगा।
  • मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैन्जिबल इनकम्स (MISHTI) कार्यक्रम को भी वर्ष 2029 तक बढ़ाते हुए अतिरिक्त ₹500 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

आस्था वन संरक्षण योजना भारत की पारंपरिक पर्यावरणीय धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना न केवल पवित्र उपवनों के संरक्षण को मजबूत करेगी, बल्कि जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के दीर्घकालिक संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

Originally written on July 11, 2026 and last modified on July 11, 2026.

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