आरबीआई ने लीड बैंक योजना के लिए जारी किए संशोधित दिशा-निर्देश
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 19 जून 2026 को प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/502 के माध्यम से लीड बैंक योजना (लीड बैंक स्कीम) के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए। नए निर्देशों ने इस योजना से संबंधित पूर्व के सभी दिशा-निर्देशों का स्थान ले लिया है। संशोधित ढांचा जिला स्तर पर ऋण योजना, बैंकिंग समन्वय, वित्तीय समावेशन तथा विभिन्न समितियों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर केंद्रित है।
लीड बैंक योजना क्या है?
लीड बैंक योजना भारत में जिला स्तर पर बैंकिंग समन्वय और ऋण नियोजन के लिए विकसित एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इस योजना के तहत प्रत्येक जिले के लिए एक बैंक को लीड बैंक के रूप में नामित किया जाता है। यह बैंक जिले में विभिन्न बैंकों की गतिविधियों का समन्वय करता है और शाखा स्तर की बैंकिंग गतिविधियों को जिला एवं राज्य स्तरीय विकास योजनाओं से जोड़ने का कार्य करता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं का विस्तार, ऋण वितरण में संतुलन तथा आर्थिक विकास को गति देना है।
जिला स्तर पर नई व्यवस्थाएं
संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार प्रत्येक जिले में एक विशेष लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) की नियुक्ति अनिवार्य होगी। सामान्य परिस्थितियों में एक एलडीएम केवल एक जिले की जिम्मेदारी संभालेगा, जबकि बहु-जिला जिम्मेदारी केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जा सकेगी। इसके अतिरिक्त एलडीएम कार्यालयों में समर्पित कर्मचारी, सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना, वाहन तथा अलग बजट की व्यवस्था करना भी आवश्यक होगा। इससे जिला स्तर पर बैंकिंग योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
त्रिस्तरीय ऋण नियोजन प्रणाली को मजबूती
नई व्यवस्था में ब्लॉक स्तरीय बैंकर्स समितियों को त्रिस्तरीय ऋण नियोजन प्रणाली का आधार बनाया गया है। ब्लॉक स्तर की योजनाएं जिला योजनाओं का आधार बनेंगी और आगे इन्हें राज्य स्तरीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इस प्रणाली में ब्लॉक लेवल बैंकर्स कमेटी, जिला परामर्शदात्री समिति, जिला स्तरीय समीक्षा समिति तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति प्रमुख भूमिका निभाएंगी। सभी समितियों की बैठकों, एजेंडा पत्रों, कार्यवृत्त और अनुपालन रिपोर्टों के लिए एक समान समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिससे निर्णयों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गति आएगी।
ऋण प्रवाह और वित्तीय समावेशन पर जोर
आरबीआई ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखाओं के लिए 60 प्रतिशत क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात का राष्ट्रीय मानक बरकरार रखा है। यह अनुपात किसी क्षेत्र में जमा राशि की तुलना में दिए गए ऋण का स्तर दर्शाता है और बैंकिंग गतिविधियों के आकलन का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। संशोधित दिशा-निर्देशों में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने, वित्तीय समावेशन को मजबूत करने तथा डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों के अंतर्गत अब कृषि, एमएसएमई, वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान से संबंधित चार उप-समितियां कार्य करेंगी।
बैठकों में वर्चुअल भागीदारी की सुविधा
नई व्यवस्था के तहत उन परिस्थितियों में वर्चुअल भागीदारी की अनुमति दी गई है, जहां किसी सदस्य के लिए भौतिक रूप से उपस्थित होना कठिन हो। इससे समितियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लीड बैंक योजना का उद्देश्य जिला स्तर पर बैंकिंग समन्वय और ऋण नियोजन को बेहतर बनाना है।
- क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात बैंक जमा और ऋण वितरण के बीच संबंध को दर्शाता है।
- एमएसएमई का पूर्ण रूप माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) है।
- जिला परामर्शदात्री समिति और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति लीड बैंक योजना की प्रमुख संस्थागत इकाइयाँ हैं।
आरबीआई द्वारा जारी यह संशोधित ढांचा भारत में बैंकिंग प्रणाली को अधिक संगठित, उत्तरदायी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे जिला स्तर पर ऋण वितरण की गुणवत्ता में सुधार, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा तथा आर्थिक विकास की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की उम्मीद की जा रही है।