आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड के लिए जारी किया संशोधित ढांचा
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 19 जून 2026 को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के लिए संशोधित और अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इससे पहले फरवरी 2026 में जारी मसौदा दिशानिर्देशों पर सार्वजनिक सुझाव और परामर्श लिए गए थे। संशोधित ढांचे का उद्देश्य कृषि ऋण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है। किसान क्रेडिट कार्ड योजना देश के किसानों और कृषि से जुड़ी गतिविधियों में लगे लोगों को समय पर संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके जरिए फसल उत्पादन, कटाई के बाद के खर्च और कृषि कार्यों के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जाती है।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना का महत्व
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत किसानों को साहूकारों पर निर्भरता कम करने और उन्हें आसान शर्तों पर बैंकिंग ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। यह योजना कृषि क्षेत्र में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस योजना का लाभ केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और अन्य कृषि-संबद्ध गतिविधियों में लगे लोगों को भी मिलता है।
फसल अवधि के नियमों में बदलाव
संशोधित ढांचे के तहत आरबीआई ने फसल अवधि को मानकीकृत किया है। अब अल्पावधि फसलों के लिए फसल अवधि 12 महीने और दीर्घावधि फसलों के लिए 18 महीने निर्धारित की गई है। यह व्यवस्था बैंकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले आय मान्यता एवं परिसंपत्ति वर्गीकरण (Income Recognition and Asset Classification) मानकों के अनुरूप है। इससे ऋण की निगरानी, पुनर्भुगतान और ऋण खातों के वर्गीकरण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
संपार्श्विक और मार्जिन संबंधी प्रावधान
आरबीआई ने कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए प्रति उधारकर्ता 2 लाख रुपये तक के ऋण पर संपार्श्विक (कोलेटरल) और मार्जिन की छूट को जारी रखा है। यदि कोई किसान स्वेच्छा से सोना या चांदी गिरवी रखकर 2 लाख रुपये तक का कृषि ऋण लेता है, तो इसे संपार्श्विक-मुक्त ऋण नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। हालांकि 2 लाख रुपये से अधिक के केसीसी ऋणों के लिए संपार्श्विक और मार्जिन की शर्तें बैंक अपनी ऋण नीति और आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार तय करेंगे। आरबीआई ने संपार्श्विक-मुक्त ऋण सीमा को बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। यह सीमा दिसंबर 2024 में संशोधित की गई थी।
सीमांत किसानों के लिए विशेष प्रावधान
संशोधित ढांचे में सीमांत किसानों को विशेष राहत दी गई है। एक हेक्टेयर तक भूमि रखने वाले किसानों को 10,000 रुपये से 50,000 रुपये तक की लचीली ऋण सीमा उपलब्ध कराई जाएगी। यह सीमा भूमि के मूल्य से नहीं बल्कि बैंक के आकलन के आधार पर निर्धारित होगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार ऋण प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- किसान क्रेडिट कार्ड भारत में कृषि ऋण उपलब्ध कराने का प्रमुख बैंकिंग साधन है।
- आय मान्यता एवं परिसंपत्ति वर्गीकरण (IRAC) मानकों का उपयोग बैंक ऋण खातों को मानक, उप-मानक, संदिग्ध और हानि परिसंपत्तियों के रूप में वर्गीकृत करने के लिए करते हैं।
- कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए 2 लाख रुपये तक का ऋण संपार्श्विक-मुक्त उपलब्ध कराया जाता है।
- भारतीय कृषि नीति के अनुसार एक हेक्टेयर तक भूमि रखने वाले किसान सामान्यतः सीमांत किसान कहलाते हैं।
आरबीआई द्वारा जारी संशोधित किसान क्रेडिट कार्ड ढांचा कृषि ऋण व्यवस्था को अधिक सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को उनकी जरूरतों के अनुरूप ऋण सुविधा मिलेगी, जबकि बैंकिंग प्रणाली में ऋण प्रबंधन और निगरानी की प्रक्रिया भी अधिक सुव्यवस्थित होगी। यह बदलाव कृषि क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता और ग्रामीण विकास को मजबूत करने में सहायक साबित हो सकता है।