आईआईटी हैदराबाद की नई पहल से परमाणु तकनीक प्रशिक्षण को मिली दिशा

आईआईटी हैदराबाद की नई पहल से परमाणु तकनीक प्रशिक्षण को मिली दिशा

आईआईटी हैदराबाद और क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने 3 अगस्त 2026 को ‘अनुग्यान’ नाम से न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी ओरिएंटेशन प्रोग्राम शुरू किया। यह भारत का पहला ऐसा उद्योग-शिक्षा आधारित कोर्स बताया गया है, जो सिविल न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर के इंजीनियरों और उद्योग पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है। तीन महीने का यह आवासीय कार्यक्रम परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कौशल, सुरक्षा और तकनीकी समझ को मजबूत करने पर केंद्रित है।

क्या है ‘अनुग्यान’ और किसके लिए है

यह कार्यक्रम पूरी तरह से आईआईटी हैदराबाद परिसर में संचालित होगा और इसमें कक्षा-आधारित शिक्षण के साथ उद्योग विशेषज्ञों का व्यावहारिक अनुभव भी जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि परमाणु ऊर्जा से जुड़े वास्तविक औद्योगिक कार्यों की समझ विकसित करना भी है। कोर्स पूरा करने वाले प्रतिभागियों को आईआईटी हैदराबाद और क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स की संयुक्त प्रमाणपत्र मिलेगा।

पाठ्यक्रम में किन विषयों पर फोकस

‘अनुग्यान’ का पाठ्यक्रम परमाणु इंजीनियरिंग और न्यूक्लियर पावर प्लांट संचालन से जुड़े प्रमुख विषयों को कवर करता है। इसमें रिएक्टर फिजिक्स, थर्मल हाइड्रोलिक्स, रेडिएशन शील्डिंग, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स, न्यूक्लियर सेफ्टी, क्वालिटी एश्योरेंस, इंजीनियरिंग डिजाइन, एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड के अनुपालन और सिम्युलेटर-आधारित प्रशिक्षण शामिल हैं। इन विषयों का चयन इस तरह किया गया है कि प्रतिभागी तकनीकी और नियामकीय, दोनों स्तरों पर तैयार हो सकें।

उद्योग, शोध और नियमन को जोड़ने की कोशिश

इस पहल की पृष्ठभूमि में आईआईटी हैदराबाद, दासो सिस्टम्स और क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स के बीच भारत इनोवेट 2026 के दौरान नीस, फ्रांस में हुए समझौते की भूमिका भी रही। उसी समझौते के तहत न्यूक्लियर इंजीनियरिंग में सेंटर ऑफ डिजाइन एक्सीलेंस, यानी CODENE, की अवधारणा को आगे बढ़ाया गया था। यह कार्यक्रम शोध संस्थानों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, EPC कंपनियों, विनिर्माण उद्योगों और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी संगठनों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर होते हैं, जिन्हें मॉड्यूलर तरीके से बनाया और तैनात किया जा सकता है।
  • एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड भारत में सिविल न्यूक्लियर सुविधाओं का सुरक्षा नियामक है।
  • रिएक्टर फिजिक्स और थर्मल हाइड्रोलिक्स परमाणु इंजीनियरिंग के मूल विषय माने जाते हैं।
  • संयुक्त प्रमाणपत्र उद्योग-शिक्षा आधारित कौशल कार्यक्रमों की एक सामान्य विशेषता है।

भारत में परमाणु ऊर्जा को बिजली उत्पादन मिश्रण का अहम हिस्सा माना जाता है, और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मानव संसाधन तैयार करने में मदद कर सकते हैं। खासकर जब देश 2047 तक लगभग 100 GWe परमाणु क्षमता का लक्ष्य देख रहा है, तब इस तरह की पहलें तकनीकी आधार को और मजबूत करती हैं।

Originally written on August 4, 2026 and last modified on August 4, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *