टाटा की Agratas ने लिथियम सेल तकनीक में बढ़ाई आत्मनिर्भरता
टाटा समूह की बैटरी इकाई Agratas गुजरात के साणंद स्थित अपने संयंत्र के लिए स्वदेशी लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) सेल तकनीक विकसित कर रही है। कंपनी घरेलू स्तर पर डिजाइन किए गए LFP सेल के लिए एक पायलट उत्पादन लाइन भी तैयार कर रही है और बेंगलुरु में बैटरी रसायन विकास के लिए नया शोध केंद्र स्थापित कर रही है। यह कदम भारत में बैटरी निर्माण को आयात-निर्भरता से निकालकर तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जाने वाला माना जा रहा है।
साणंद संयंत्र और उत्पादन योजना
गुजरात के साणंद में बन रहा Agratas का संयंत्र शुरुआती चरण में 20 GWh वार्षिक क्षमता के साथ तैयार किया जा रहा है। GWh यानी गीगावाट-घंटा, बड़े पैमाने पर बैटरी उत्पादन और ऊर्जा भंडारण क्षमता मापने की मानक इकाई है। कंपनी की योजना है कि यह संयंत्र 2027 की शुरुआत तक NMC बैटरी सेल का उत्पादन शुरू करे।यहां NMC यानी निकल मैंगनीज कोबाल्ट तकनीक का उपयोग होगा, जिसके लिए Agratas जापान की Automotive Energy Supply Corp. से लाइसेंस प्राप्त तकनीक ले रही है। इसके उलट LFP कार्यक्रम कंपनी का अपना इन-हाउस विकास प्रयास है, जिससे यह साफ होता है कि टाटा समूह एक ही समय में लाइसेंस आधारित और स्वदेशी, दोनों तरह की बैटरी क्षमताएं विकसित कर रहा है।
LFP तकनीक क्यों अहम है
लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी रसायन अपनी तापीय स्थिरता, लंबी जीवन-चक्र क्षमता और कम लागत संरचना के लिए जानी जाती है। इसमें NMC सेल की तुलना में निकल और कोबाल्ट पर निर्भरता कम होती है, इसलिए आपूर्ति श्रृंखला के जोखिम भी कुछ हद तक घटते हैं। यही कारण है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ स्थिर ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में भी LFP तकनीक की मांग बढ़ रही है।Agratas ने इस तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए भारत, दक्षिण कोरिया और चीन के इंजीनियरों की एक तकनीकी टीम भी बनाई है, जो उत्पादन प्रक्रिया को बेहतर बनाने और बैटरी प्रदर्शन को परखने पर काम कर रही है। बैटरी सेल निर्माण में सामग्री चयन, इलेक्ट्रोड डिजाइन, इलेक्ट्रोलाइट फॉर्मूलेशन, फॉर्मेशन प्रक्रिया और गुणवत्ता परीक्षण जैसे कई चरण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
भारत की बैटरी सप्लाई चेन पर असर
चीन द्वारा बैटरी निर्माण से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण तकनीकों के निर्यात पर सख्ती के बाद दुनिया भर में सेल तकनीक में स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर जोर बढ़ा है। ऐसे माहौल में Agratas का यह निवेश भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखता है, क्योंकि देश में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग और ऊर्जा भंडारण बाजार दोनों तेजी से विस्तार कर रहे हैं।कंपनी बेंगलुरु में जिस शोध सुविधा पर 400 मिलियन डॉलर से अधिक निवेश कर रही है, उसका उद्देश्य LFP और उससे जुड़ी अन्य बैटरी रसायन तकनीकों को विकसित करना है। इससे भविष्य में भारत में बैटरी सेल डिजाइन, परीक्षण और उत्पादन की स्थानीय क्षमता मजबूत हो सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- LFP का पूरा नाम लिथियम आयरन फॉस्फेट है और यह एक प्रमुख लिथियम-आयन बैटरी रसायन है।
- NMC का अर्थ निकल मैंगनीज कोबाल्ट है, जिसका उपयोग उच्च ऊर्जा घनत्व वाली बैटरियों में होता है।
- GWh बड़े बैटरी संयंत्रों की उत्पादन क्षमता मापने की मानक इकाई है।
- Agratas टाटा समूह की बैटरी इकाई है और इसका एक संयंत्र इंग्लैंड के सोमरसेट में भी बन रहा है।
कुल मिलाकर, Agratas की यह पहल भारत में बैटरी तकनीक के घरेलू विकास, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए जरूरी औद्योगिक आधार तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।