आईआईएससी की नई प्रयोगशाला से भारत के क्वांटम शोध को बढ़ावा

आईआईएससी की नई प्रयोगशाला से भारत के क्वांटम शोध को बढ़ावा

बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) परिसर में 15 अक्टूबर 2026 को क्वांटम अनुसंधान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया। सैमसंग सेमीकंडक्टर इंडिया रिसर्च (एसएसआईआर) ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व सहायता से इस सुविधा की स्थापना में सहयोग दिया है। प्रयोगशाला में क्वांटम प्रौद्योगिकी और उन्नत अर्धचालकों से जुड़े शोध तथा प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाएगा।

शोध और प्रशिक्षण के लिए साझा सुविधा

एसएसआईआर और आईआईएससी के बीच इस सहयोग की घोषणा अक्टूबर 2023 में हुई थी। आईआईएससी के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मयंक श्रीवास्तव को इस पहल का नेतृत्व सौंपा गया। नई प्रयोगशाला में ऐसे विशेष उपकरण और प्रायोगिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिनका उपयोग शोधकर्ता और विद्यार्थी क्वांटम तकनीकों के अध्ययन और परीक्षण के लिए कर सकेंगे।

इस सुविधा का उद्देश्य केवल एक संस्थान तक शोध को सीमित रखना नहीं है। देश के विभिन्न संस्थानों के शोधार्थियों और विद्यार्थियों को विशेष उपकरणों तक पहुँच तथा प्रयोगशाला में काम करने का अनुभव देने की योजना है। इससे क्वांटम तकनीक के उभरते क्षेत्र के लिए कुशल प्रतिभाएँ तैयार करने और भारत की शोध क्षमता मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

क्वांटम उपकरणों पर केंद्रित शोध

प्रयोगशाला के अनुसंधान क्षेत्रों में क्वांटम बिटों का गुण-निर्धारण, अत्यंत कम तापमान पर काम करने वाले इलेक्ट्रॉनिक तंत्र, क्वांटम उपकरणों की विश्वसनीयता, एकल-फोटॉन स्रोत और संसूचक शामिल हैं। साथ ही, उन्नत अर्धचालक पदार्थों को क्वांटम प्रणालियों के साथ जोड़ने पर भी काम होगा।

क्वांटम बिट, जिसे क्यूबिट भी कहते हैं, क्वांटम सूचना की मूल इकाई है। पारंपरिक बिट का मान शून्य या एक होता है, जबकि क्यूबिट क्वांटम सुपरपोज़िशन के कारण इन अवस्थाओं के संयोजन में रह सकता है। क्यूबिट का गुण-निर्धारण उसके प्रदर्शन और क्वांटम गणनाओं के लिए जरूरी विशेषताओं को मापने में मदद करता है। सुपरकंडक्टिंग क्वांटम संगणना में बहुत कम तापमान की आवश्यकता होती है, इसलिए क्रायोजेनिक इलेक्ट्रॉनिक्स इस क्षेत्र का अहम हिस्सा है। एकल फोटॉन स्रोत और संसूचक क्वांटम संचार संबंधी अनुसंधान में उपयोगी होते हैं।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अनुरूप पहल

भारत सरकार ने 2023 में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन शुरू किया था। इसके लिए 2023–24 से 2030–31 की अवधि में 6,003.65 करोड़ रुपये का परिव्यय स्वीकृत किया गया है। मिशन के चार प्रमुख क्षेत्र क्वांटम संगणना, क्वांटम संचार, क्वांटम संवेदन एवं मापन-विज्ञान और क्वांटम पदार्थ एवं उपकरण हैं। आईआईएससी की नई प्रयोगशाला में प्रस्तावित शोध इनमें से कई क्षेत्रों, विशेषकर उपकरणों और अर्धचालक तकनीक, से जुड़ता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय विज्ञान संस्थान की स्थापना 1909 में बेंगलुरु में हुई थी।
  • क्यूबिट क्वांटम सूचना की मूल इकाई है।
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के चार विषयगत क्षेत्र संगणना, संचार, संवेदन एवं मापन-विज्ञान तथा पदार्थ एवं उपकरण हैं।
  • एसएसआईआर–आईआईएससी साझेदारी की घोषणा अक्टूबर 2023 में हुई थी और प्रयोगशाला का उद्घाटन 15 अक्टूबर 2026 को किया गया।

विशेष उपकरणों, प्रशिक्षण और संस्थानों के बीच सहयोग को एक साथ लाने वाली यह प्रयोगशाला भारत में क्वांटम अनुसंधान के लिए जरूरी वैज्ञानिक आधार और प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

Originally written on October 16, 2026 and last modified on October 16, 2026.

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