आदित्य-एल1 और प्रोबा-3 से सौर विस्फोटों की बेहतर पड़ताल

आदित्य-एल1 और प्रोबा-3 से सौर विस्फोटों की बेहतर पड़ताल

भारत के आदित्य-एल1 और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के प्रोबा-3 मिशन ने 16 अक्टूबर 2026 को सूर्य से निकलने वाले विस्फोटों का संयुक्त अवलोकन किया। दोनों मिशनों के उपकरणों से मिले आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों ने सूर्य के पास कोरोना द्रव्य निष्कासन की मात्रा, घनत्व और ऊर्जा का आकलन किया। यह अध्ययन सूर्य की गतिविधियों और उनके अंतरिक्ष मौसम पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने में मददगार है।

सौर ज्वालाएं और कोरोना द्रव्य निष्कासन

सौर ज्वाला सूर्य के वायुमंडल में ऊर्जा का अचानक उत्सर्जन है। इसके विपरीत, कोरोना द्रव्य निष्कासन में सूर्य के कोरोना से बड़ी मात्रा में प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र अंतरिक्ष में बाहर निकलते हैं। ये दोनों घटनाएं अंतरिक्ष मौसम को प्रभावित कर सकती हैं और पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्षीय वातावरण पर असर डाल सकती हैं। इसलिए इनके आकार, गति और ऊर्जा का सटीक मापन वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है।

आदित्य-एल1 के दृश्यमान उत्सर्जन रेखा कोरोनाग्राफ और प्रोबा-3 के एएसपीआईआईसी उपकरण के आंकड़ों का उपयोग इस अध्ययन में किया गया। अलग-अलग अवलोकन पद्धतियों से प्राप्त जानकारी को साथ रखने से सूर्य के निकट की घटनाओं का अधिक विस्तृत चित्र मिला।

दो मिशनों की अलग-अलग अवलोकन क्षमता

आदित्य-एल1 भारत का पहला समर्पित सौर मिशन है। इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 2 सितंबर 2023 को प्रक्षेपित किया था। 6 जनवरी 2024 को यह सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के एल1 बिंदु के आसपास हेलो कक्षा में पहुंचा। इस कक्षा से अंतरिक्षयान सूर्य को लगातार देख सकता है। इसके कोरोनाग्राफ का उद्देश्य सूर्य के बाहरी वायुमंडल यानी कोरोना का अध्ययन करना है।

प्रोबा-3 दो अंतरिक्षयानों का मिशन है, जिसे 5 दिसंबर 2024 को इसरो के पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया। दोनों यान सटीक संरचना में उड़ान भरकर कृत्रिम सूर्यग्रहण बनाते हैं। इससे सूर्य की तेज चमक को ढककर धुंधले कोरोना का अवलोकन संभव होता है। ईएसए ने 1 जनवरी 2026 को बताया कि मिशन ने मिलीमीटर स्तर की सटीकता के साथ स्वायत्त संरचना-उड़ान हासिल कर ली है।

संयुक्त अध्ययनों का वैज्ञानिक महत्व

आदित्य-एल1 के पिछले अध्ययनों ने सौर गतिविधियों के शुरुआती संकेतों पर भी जानकारी दी है। 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में बड़ी सौर ज्वालाओं से कुछ घंटे पहले सूर्य के वायुमंडल में छोटे और अल्पकालिक चमकीले क्षेत्र देखे गए थे। वे बाद में ज्वाला बनने वाले स्थान के आसपास केंद्रित थे। एक अन्य विश्लेषण में 2024 के सौर चक्र-25 के चरम के दौरान दर्ज 47 एक्स-श्रेणी की ज्वालाओं का अध्ययन किया गया।

प्रोबा-3 के शुरुआती वैज्ञानिक परिणामों में कोरोना के भीतरी हिस्से में सौर पवन की कुछ संरचनाएं पहले के अनुमानों से तीन से चार गुना तेज चलती पाई गईं। ऐसे निष्कर्ष सौर घटनाओं की गति और उनके संभावित प्रभावों के पूर्वानुमान को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एल1 सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के पांच लैग्रांज बिंदुओं में पहला है।
  • आदित्य-एल1 का प्रक्षेपण 2 सितंबर 2023 को हुआ था।
  • प्रोबा-3 के एएसपीआईआईसी उपकरण में कृत्रिम सूर्यग्रहण से कोरोना का अवलोकन किया जाता है।
  • प्रोबा-3 को इसरो के पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया था।

आदित्य-एल1 की निरंतर निगरानी और प्रोबा-3 की कृत्रिम ग्रहण तकनीक, सूर्य के कोरोना तथा उससे जुड़ी गतिविधियों की पड़ताल के पूरक तरीके उपलब्ध कराती हैं। दोनों मिशनों के आंकड़े सौर विस्फोटों को समझने की क्षमता को मजबूत करते हैं।

Originally written on October 16, 2026 and last modified on October 16, 2026.

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