आंध्र प्रदेश में ‘मी भूमि-मी हक्कू’ कार्यक्रम के नए चरण की शुरुआत
आंध्र प्रदेश सरकार ने 9 जुलाई 2026 को नंद्याल जिले के बनगानापल्ले से ‘मी भूमि-मी हक्कू’ कार्यक्रम के नवीनतम चरण की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य किसानों और भूमि मालिकों को डिजिटल रूप से अद्यतन एवं त्रुटिरहित पट्टादार पासबुक उपलब्ध कराना है। यह वितरण उन गांवों में किया जा रहा है जहां भूमि का पुनः सर्वेक्षण (री-सर्वे) पूरा हो चुका है। यह कार्यक्रम राज्य में भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण और पारदर्शी भूमि प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पट्टादार पासबुक क्या है?
पट्टादार पासबुक आंध्र प्रदेश में भूमि स्वामी को जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक भूमि रिकॉर्ड दस्तावेज है। इसमें भूमि स्वामित्व, सर्वे नंबर और अन्य महत्वपूर्ण विवरण दर्ज रहते हैं। इस दस्तावेज का उपयोग भूमि संबंधी प्रशासनिक कार्यों, कृषि ऋण, सरकारी योजनाओं तथा स्वामित्व सत्यापन जैसे कार्यों में किया जाता है। नई पासबुकों को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा गया है, जिससे भूमि संबंधी जानकारी अधिक विश्वसनीय और आसानी से सत्यापित की जा सके।
री-सर्वे और भूमि अभिलेखों का आधुनिकीकरण
री-सर्वे एक कैडस्ट्रल प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से भूमि की सीमाओं, सर्वे नंबरों और स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड को अद्यतन किया जाता है। आंध्र प्रदेश में अब तक 6,887 गांवों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। राज्य सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक 9,833 गांवों में लगभग 72.70 लाख त्रुटिरहित पट्टादार पासबुक वितरित करना है। यह अभियान भूमि विवादों को कम करने और रिकॉर्ड की सटीकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
नई पासबुकों की विशेषताएं
नई पट्टादार पासबुकों में राज्य का आधिकारिक प्रतीक चिन्ह और क्यूआर कोड शामिल किए गए हैं। क्यूआर कोड के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड का त्वरित सत्यापन किया जा सकता है, जबकि सुरक्षा संबंधी सुविधाएं रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की संभावना को कम करती हैं। राज्य सरकार ने भूमि स्वामित्व से जुड़ी अनिश्चितताओं को दूर करने के उद्देश्य से पूर्व के भूमि टाइटलिंग अधिनियम को भी निरस्त किया है।
कार्यक्रम की वर्तमान प्रगति
9 जुलाई 2026 तक राज्यभर में लगभग 29 लाख नई पट्टादार पासबुक किसानों और भूमि मालिकों को वितरित की जा चुकी थीं। यह वितरण अभियान आंध्र प्रदेश सरकार की व्यापक भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पारदर्शी, सुरक्षित और अद्यतन भूमि रिकॉर्ड प्रणाली विकसित करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पट्टादार पासबुक आंध्र प्रदेश में भूमि स्वामित्व का आधिकारिक दस्तावेज है।
- री-सर्वे एक कैडस्ट्रल प्रक्रिया है, जिसके तहत भूमि की सीमाओं, सर्वे नंबरों और स्वामित्व रिकॉर्ड को अद्यतन किया जाता है।
- नई पट्टादार पासबुकों में क्यूआर कोड का उपयोग रिकॉर्ड सत्यापन और सुरक्षा के लिए किया गया है।
- भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण भारत के कई राज्यों में प्रशासनिक सुधार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
आंध्र प्रदेश का ‘मी भूमि-मी हक्कू’ कार्यक्रम किसानों और भूमि मालिकों को सुरक्षित, पारदर्शी और अद्यतन भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। डिजिटल तकनीक, री-सर्वे और सुरक्षित दस्तावेजों के माध्यम से राज्य सरकार भूमि प्रशासन को अधिक विश्वसनीय बनाने तथा भविष्य में भूमि विवादों को कम करने का प्रयास कर रही है।