IGI एयरपोर्ट से कार्गो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क का विस्तार

IGI एयरपोर्ट से कार्गो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क का विस्तार

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर भारत ने अपने ट्रांसशिपमेंट कार्गो नेटवर्क का विस्तार किया है। 19 अगस्त 2026 को दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के ट्रांसशिपमेंट एक्सीलेंस सेंटर, टर्मिनल 2 से शुरू हुई इस पहल के तहत अब देश के चार प्रमुख शहरों—बेंगलुरु, अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद—को लंदन और कोपेनहेगन जैसे अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जोड़ा गया है।

ट्रांसशिपमेंट कार्गो क्या है और यह क्यों अहम है

ट्रांसशिपमेंट कार्गो वह माल होता है जिसे सीधे अंतिम गंतव्य तक भेजने के बजाय किसी मध्यवर्ती हवाई अड्डे के जरिए आगे भेजा जाता है। सिविल एविएशन में यह मॉडल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को एक हब के माध्यम से जोड़ता है, जिससे कार्गो नेटवर्क अधिक लचीला और प्रभावी बनता है। भारत में यह व्यवस्था एयर कार्गो लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने और हवाई माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस मॉडल के परीक्षण के लिए चेन्नई–दिल्ली–फ्रैंकफर्ट सेक्टर को शुरुआती प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट रूट के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद नेटवर्क को बड़े स्तर पर लागू करने का रास्ता खुला।

पायलट प्रोजेक्ट से मिले नतीजे

यह पायलट कार्यक्रम 20 जून 2026 को शुरू हुआ था और इसे एयर इंडिया ने एंड-टू-एंड संचालित किया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, पायलट चरण में 280 मीट्रिक टन कार्गो का ट्रांसशिपमेंट किया गया। परीक्षण के दौरान रूट पर विमान की क्षमता उपयोग दर 75% से बढ़कर लगभग 100% तक पहुंच गई, जो इस मॉडल की उपयोगिता को दर्शाती है।

विस्तारित नेटवर्क से एयर इंडिया की इन रूट्स पर मासिक कार्गो ढुलाई 1,763 मीट्रिक टन से बढ़कर 3,183 मीट्रिक टन होने का अनुमान है। यानी नए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बिंदुओं के जुड़ने से लगभग 80% की वृद्धि की संभावना बनी है।

सुरक्षा नियमों में बदलाव से समय की बचत

इस पहल का एक बड़ा पहलू सुरक्षा जांच प्रक्रिया में किया गया सुधार है। ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने अपने कार्गो सुरक्षा ढांचे में संशोधन करते हुए उन माल-शिपमेंट्स के लिए ट्रांजिट एयरपोर्ट पर दोबारा X-ray स्क्रीनिंग की अनावश्यक प्रक्रिया हटाई, जो पहले ही स्रोत पर सुरक्षित किए जा चुके थे।

इस बदलाव से ट्रांसशिपमेंट चेन में अनिवार्य री-स्क्रीनिंग कम हुई और ट्रांजिट समय में उल्लेखनीय कमी आई। आधिकारिक बयान के अनुसार समय 60 घंटे से घटकर 20 घंटे तक आ गया, जबकि एक अलग प्रसारण में इसे 50–60 घंटे से घटकर 17–20 घंटे बताया गया। दोनों आंकड़े इसी सुधार से जुड़े हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली में स्थित है और भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में शामिल है।
  • दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड, IGI एयरपोर्ट का संचालन और प्रबंधन कंसेशन फ्रेमवर्क के तहत करती है।
  • ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी भारत में नागरिक उड्डयन सुरक्षा का नियामक निकाय है।
  • ट्रांसशिपमेंट हब एयर कार्गो लॉजिस्टिक्स में माल को एकत्र करने, रूट कनेक्टिविटी बढ़ाने और दक्षता सुधारने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

IGI एयरपोर्ट से शुरू हुआ यह विस्तार भारत की एयर कार्गो व्यवस्था को अधिक तेज, संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Originally written on August 20, 2026 and last modified on August 20, 2026.

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