भिलाई स्टील प्लांट का CO2 डैशबोर्ड: औद्योगिक उत्सर्जन निगरानी में नई पहल

भिलाई स्टील प्लांट का CO2 डैशबोर्ड: औद्योगिक उत्सर्जन निगरानी में नई पहल

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने 18 अगस्त 2026 को भिलाई स्टील प्लांट में एक डिजिटल CO2 डैशबोर्ड शुरू किया। यह प्लेटफॉर्म छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट और महाराष्ट्र के चंद्रपुर फेरो अलॉय प्लांट, दोनों के कार्बन उत्सर्जन की निगरानी करेगा। भारी उद्योगों में उत्सर्जन को डेटा-आधारित तरीके से ट्रैक करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उत्सर्जन की रीयल-टाइम निगरानी

यह डैशबोर्ड रोज़ाना होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की रीयल-टाइम गणना और विश्लेषण करता है। इसकी खासियत यह है कि यह केवल पूरे संयंत्र के स्तर पर ही नहीं, बल्कि अलग-अलग शॉप या यूनिट स्तर पर भी उत्सर्जन का आकलन करता है। इससे किसी भी असामान्य वृद्धि या गड़बड़ी की पहचान जल्दी की जा सकती है।

इस तरह की डिजिटल निगरानी औद्योगिक संचालन में पारदर्शिता बढ़ाती है और प्रबंधन को यह समझने में मदद करती है कि किस चरण में उत्सर्जन अधिक हो रहा है। इससे सुधारात्मक कदम समय पर लिए जा सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित प्रणाली

SAIL का यह डैशबोर्ड कार्बन फुटप्रिंट आकलन के लिए कई मानकों पर आधारित है। इसमें वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन की कार्यप्रणाली, GHG प्रोटोकॉल और यूरोपीय संघ के Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) का ढांचा शामिल है। ये मानक औद्योगिक उत्सर्जन लेखांकन और उत्पाद-स्तरीय फुटप्रिंटिंग में उपयोग किए जाते हैं।

इससे SAIL को अपने उत्पादन से जुड़े उत्सर्जन को वैश्विक मानकों के अनुरूप मापने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह व्यवस्था भविष्य में निर्यात और कार्बन अनुपालन से जुड़े मामलों में भी उपयोगी हो सकती है।

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग से जुड़ाव

यह प्रणाली भारत की Carbon Credit Trading Scheme के अनुरूप भी तैयार की गई है। यह योजना ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत देश के घरेलू कार्बन बाजार का हिस्सा है। डैशबोर्ड उत्सर्जन-तीव्रता लक्ष्यों की निगरानी करेगा, जो आगे चलकर कार्बन क्रेडिट सृजन में सहायक हो सकते हैं।

औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के दौर में ऐसे डिजिटल टूल्स का महत्व बढ़ रहा है। ये न केवल उत्सर्जन नियंत्रण में मदद करते हैं, बल्कि अनुपालन, रिपोर्टिंग और पर्यावरणीय प्रदर्शन सुधारने में भी भूमिका निभाते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • SAIL भारत का महारत्न सार्वजनिक उपक्रम है और यह इस्पात मंत्रालय के अधीन काम करता है।
  • भिलाई स्टील प्लांट छत्तीसगढ़ में स्थित भारत के प्रमुख एकीकृत इस्पात संयंत्रों में से एक है।
  • चंद्रपुर फेरो अलॉय प्लांट महाराष्ट्र में स्थित है और SAIL के उत्पादन नेटवर्क का हिस्सा है।
  • Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) यूरोपीय संघ की वह नीति है जो आयात पर कार्बन मूल्य निर्धारण से जुड़ी है।

इस पहल से SAIL ने दिखाया है कि पारंपरिक भारी उद्योग भी डिजिटल निगरानी और उत्सर्जन प्रबंधन के जरिए अधिक पर्यावरण-अनुकूल दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

Originally written on August 20, 2026 and last modified on August 20, 2026.

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