IASV त्रिवेणी का समुद्री अभियान
भारतीय सेना के सेलिंग वेसल IASV त्रिवेणी ने विश्व परिक्रमा अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की 10 महिला अधिकारियों से युक्त यह दल वर्तमान में केप टाउन से मुंबई की ओर यात्रा कर रहा है। यह अभियान 11 सितंबर 2025 को मुंबई से शुरू हुआ था और जून 2026 तक पूरा होने की संभावना है। इस अभियान को “समुद्र प्रदक्षिणा” नाम दिया गया है, जो भारत का पहला सर्व-महिला त्रि-सेवा वैश्विक समुद्री परिक्रमा अभियान माना जा रहा है।
IASV त्रिवेणी और अभियान की विशेषताएं
IASV त्रिवेणी एक 50 फुट लंबी नौकायन यॉट है, जिसका निर्माण पुडुचेरी में किया गया है। यह पोत भारतीय सशस्त्र बलों की महिला अधिकारियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल अनुजा वरुडकर कर रही हैं, जबकि स्क्वाड्रन लीडर श्रद्धा पी राजू उप-अभियान प्रमुख की भूमिका निभा रही हैं। यह अभियान महिलाओं की समुद्री क्षमता, नेतृत्व और साहस का प्रतीक माना जा रहा है। त्रि-सेवा दल में सेना, नौसेना और वायुसेना की अधिकारी शामिल हैं, जो संयुक्त रूप से इस कठिन समुद्री यात्रा को पूरा कर रही हैं।
अभियान का मार्ग और दूरी
समुद्र प्रदक्षिणा अभियान मुंबई से शुरू हुआ और अब तक 23,000 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय कर चुका है। अभियान के दौरान दल ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अर्जेंटीना और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में ठहराव किया। पूरे अभियान में लगभग 43,000 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। यह यात्रा विश्व के विभिन्न महासागरों और चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों से होकर गुजर रही है।
समुद्री यात्रा की प्रमुख चुनौतियां
इस वैश्विक परिक्रमा के दौरान दल दो बार भूमध्य रेखा को पार करेगा और दुनिया के तीन प्रसिद्ध केपों के आसपास से यात्रा करेगा। इनमें केप लीउविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप शामिल हैं। ये तीनों केप लंबे समुद्री अभियानों में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। विशेष रूप से केप हॉर्न को दुनिया के सबसे कठिन समुद्री मार्गों में गिना जाता है, जहां तेज हवाएं और ऊंची लहरें नौवहन को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।
भारतीय सशस्त्र बलों के लिए महत्व
यह अभियान भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका और क्षमताओं को प्रदर्शित करता है। इसके माध्यम से समुद्री प्रशिक्षण, टीमवर्क, नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय समुद्री अनुभव को भी बढ़ावा मिल रहा है। इस तरह के अभियान भारत की समुद्री शक्ति और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में देखे जा रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- IASV त्रिवेणी एक भारतीय सेना का सेलिंग वेसल है जिसका निर्माण पुडुचेरी में हुआ है।
- समुद्र प्रदक्षिणा भारत का पहला सर्व-महिला त्रि-सेवा वैश्विक समुद्री अभियान है।
- इस अभियान में सेना, नौसेना और वायुसेना की 10 महिला अधिकारी शामिल हैं।
- केप हॉर्न, केप लीउविन और केप ऑफ गुड होप विश्व के प्रमुख समुद्री केप माने जाते हैं।
IASV त्रिवेणी का यह अभियान भारतीय महिला अधिकारियों के साहस, नेतृत्व और समुद्री कौशल का प्रेरणादायक उदाहरण है। यह पहल न केवल भारत की समुद्री क्षमता को दर्शाती है बल्कि महिला सशक्तिकरण और त्रि-सेवा समन्वय को भी नई पहचान देती है।