DGFT ने EODC प्रक्रिया को बनाया पेपरलेस, निर्यातकों को राहत

DGFT ने EODC प्रक्रिया को बनाया पेपरलेस, निर्यातकों को राहत

निर्यातकों के लिए एक अहम बदलाव करते हुए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने EODC आवेदन प्रक्रिया में भौतिक ड्यूटी चालान की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। अब एडवांस ऑथराइजेशन और EPCG योजनाओं के तहत किए गए स्वैच्छिक शुल्क भुगतान की जानकारी सीधे कस्टम्स और ICEGATE से DGFT की ऑनलाइन प्रणाली में पहुंचेगी, जिससे सत्यापन तेज और अधिक पारदर्शी होगा।

क्या बदला और क्यों महत्वपूर्ण है

Export Obligation Discharge Certificate यानी EODC वह प्रमाणपत्र है, जो तब जारी किया जाता है जब निर्यातक अपनी लाइसेंस या प्राधिकरण से जुड़ी निर्यात-शर्त पूरी कर देता है। पहले इस प्रक्रिया में भौतिक TR-6 चालान की जरूरत पड़ती थी, जिससे दस्तावेज़ों की दोहराव वाली समस्या और समय की देरी होती थी। अब Trade Notice No. 15/2026-27 के तहत DGFT और ICEGATE के बीच API आधारित डेटा-एक्सचेंज शुरू किया गया है, जिससे भुगतान विवरण स्वतः सिस्टम में उपलब्ध होंगे।

निर्यात योजनाओं से जुड़ा बदलाव

यह सुधार मुख्य रूप से दो प्रमुख निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं पर लागू है। एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत निर्यात उत्पादन के लिए आवश्यक इनपुट शुल्क-मुक्त आयात किए जा सकते हैं। वहीं EPCG योजना में पूंजीगत वस्तुओं का आयात रियायती या शून्य सीमा शुल्क पर किया जाता है, लेकिन इसके बदले तय अवधि में निर्यात-शर्त पूरी करनी होती है। दोनों योजनाएं विदेशी व्यापार नीति और विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत DGFT द्वारा संचालित होती हैं।

डिजिटल सत्यापन से कैसे बदलेगी प्रक्रिया

नई व्यवस्था में स्वैच्छिक शुल्क भुगतान का डेटा कस्टम्स रिकॉर्ड से सीधे DGFT बैक ऑफिस में दिखाई देगा। क्षेत्रीय प्राधिकरण अब उसी इलेक्ट्रॉनिक जानकारी के आधार पर EODC आवेदन की जांच करेंगे। निर्यातक भी DGFT कस्टमर पोर्टल पर लॉगिन करके यह देख सकेंगे कि भुगतान सही लाइसेंस या प्राधिकरण से मैप हुआ है या नहीं। इससे आवेदन दाखिल करने से पहले त्रुटि सुधारने में मदद मिलेगी और अस्वीकृति की संभावना कम होगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • DGFT का पूरा नाम Directorate General of Foreign Trade है और यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करता है।
  • ICEGATE यानी Indian Customs Electronic Gateway, भारत में कस्टम्स डेटा एक्सचेंज और इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग के लिए इस्तेमाल होता है।
  • EODC तब जारी होता है जब निर्यातक अपनी लाइसेंस-आधारित निर्यात बाध्यता पूरी कर देता है।
  • Advance Authorisation और EPCG दोनों निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं हैं, जिनमें निर्यात-शर्त पूरी करना अनिवार्य होता है।

इस बदलाव से EODC प्रक्रिया अधिक डिजिटल, तेज और कम कागजी हो जाएगी। निर्यातकों के लिए यह कदम अनुपालन को आसान बनाने के साथ-साथ सरकारी प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Originally written on August 10, 2026 and last modified on August 10, 2026.

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