AMCA इंजन परियोजना में रिलायंस-रोल्स-रॉयस साझेदारी से स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा
भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान कार्यक्रम AMCA को लेकर निजी क्षेत्र और वैश्विक एयरोस्पेस तकनीक का नया मेल सामने आया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और रोल्स-रॉयस ने 14 अगस्त 2026 को भारत में एक स्वदेशी कॉम्बैट इंजन के डिजाइन, विकास और निर्माण के लिए रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। यह सहयोग ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और उच्च-प्रौद्योगिकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
AMCA कार्यक्रम क्यों अहम है
Advanced Medium Combat Aircraft यानी AMCA भारत का प्रस्तावित पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम है। इस श्रेणी के विमान कम रडार दृश्यता, उन्नत एवियोनिक्स, सेंसर फ्यूजन और हथियारों के आंतरिक वहन जैसी क्षमताओं के लिए जाने जाते हैं। ऐसे विमान के लिए उच्च-थ्रस्ट इंजन की जरूरत होती है, जिसे भारत में ही विकसित और निर्मित करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रक्षा क्षेत्र में इंजन तकनीक सबसे जटिल और रणनीतिक क्षमताओं में से एक मानी जाती है। इसलिए AMCA के लिए स्वदेशी इंजन विकसित होना केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में भी कदम है।
रिलायंस और रोल्स-रॉयस की भूमिका
रोल्स-रॉयस ब्रिटेन की जानी-मानी इंजीनियरिंग कंपनी है, जो एयरोस्पेस प्रोपल्शन सिस्टम, मरीन इंजन और पावर सिस्टम के लिए वैश्विक स्तर पर पहचानी जाती है। दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल, दूरसंचार और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भारतीय समूह है। इस साझेदारी में रोल्स-रॉयस की प्रोपल्शन तकनीक और रिलायंस की विनिर्माण क्षमता को जोड़ने की बात कही गई है।
दोनों कंपनियों ने यह भी संकेत दिया है कि भारत में एक Aerospace Gas Turbine Complex स्थापित किया जा सकता है। यह परिसर इंजन के डिजाइन, विकास, निर्माण, परीक्षण और पूरे जीवन-चक्र के रखरखाव से जुड़ा होगा।
रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र पर असर
यह साझेदारी एक निजी वाणिज्यिक समझौता है और अपने आप में भारत सरकार का आधिकारिक इंजन अनुबंध नहीं मानी जाती। फिर भी, यह कदम भारत के रक्षा-औद्योगिक ढांचे के लिए अहम है क्योंकि इससे घरेलू उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और उच्च-स्तरीय इंजीनियरिंग क्षमताओं को बल मिल सकता है।
इस क्षेत्र में पहले से ही रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के Gas Turbine Research Establishment की भूमिका रही है, जो स्वदेशी एयरो-इंजन विकास पर काम करता है। साथ ही, फ्रांस की सफ्रान कंपनी का भी DRDO के साथ उच्च-थ्रस्ट AMCA इंजन प्रस्ताव से जुड़ाव बताया जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- AMCA भारत का प्रस्तावित पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान कार्यक्रम है।
- पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की पहचान कम रडार दृश्यता और उन्नत सेंसर क्षमताओं से होती है।
- रोल्स-रॉयस यूनाइटेड किंगडम की प्रमुख एयरोस्पेस प्रोपल्शन कंपनी है।
- Gas Turbine Research Establishment, DRDO की वह इकाई है जो भारत में स्वदेशी एयरो-इंजन विकास पर काम करती है।
कुल मिलाकर, रिलायंस-रोल्स-रॉयस साझेदारी भारत में रक्षा इंजन निर्माण की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। यदि यह सहयोग आगे ठोस औद्योगिक ढांचे में बदलता है, तो AMCA जैसे कार्यक्रमों को घरेलू तकनीकी आधार मिलने की संभावना बढ़ सकती है।