बिजली क्षेत्र में साइबर सुरक्षा अब सख्त, CEA ने लागू किए नए नियम
देश के बिजली क्षेत्र को साइबर हमलों से बचाने के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने नए और बाध्यकारी साइबर सुरक्षा नियम अधिसूचित किए हैं। Central Electricity Authority (Cyber Security in Power Sector) Regulations, 2026 बिजली उत्पादन, भंडारण, ट्रेडिंग और ग्रिड संचालन से जुड़े संस्थानों के लिए एक औपचारिक सुरक्षा ढांचा तैयार करते हैं। इन नियमों का सामान्य प्रभावी तिथि 1 अप्रैल 2027 तय की गई है।
अब स्वैच्छिक नहीं, कानूनी जिम्मेदारी
अब तक बिजली क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर अधिकतर अनुपालन सलाह या दिशानिर्देशों पर आधारित था, लेकिन नए नियम इसे वैधानिक व्यवस्था में बदल देते हैं। इसका मतलब है कि अब ग्रिड से जुड़े संस्थानों को साइबर ऑडिट, घटना रिपोर्टिंग, अभ्यास और प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिजली व्यवस्था केवल एक औद्योगिक सेवा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अवसंरचना का संवेदनशील हिस्सा है।
ये नियम 50 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले जनरेटिंग कंपनियों, कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट्स और ऊर्जा भंडारण प्रणाली इकाइयों पर लागू होंगे। इसके साथ ही बिजली एक्सचेंज और ओवर-द-काउंटर प्लेटफॉर्म भी इस दायरे में आएंगे, जिनका उपयोग बिजली व्यापार के लिए किया जाता है।
CSIRT-Power को मिली केंद्रीय भूमिका
नए ढांचे में CSIRT-Power को बिजली क्षेत्र के लिए नोडल साइबर सुरक्षा एजेंसी बनाया गया है। यह संस्था अप्रैल 2023 में बनाई गई थी और अब क्षेत्रीय संस्थानों के लिए ऑडिट, अभ्यास और घटना-प्रतिक्रिया समन्वय का काम करेगी।
नियमों के अनुसार, सामान्य साइबर घटनाओं की सूचना CSIRT-Power और CERT-In दोनों को छह घंटे के भीतर देनी होगी। यदि किसी घटना को महत्वपूर्ण प्रणालियों के खिलाफ साइबर सैबोटाज माना जाता है, तो रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर करनी होगी। यह समयसीमा इसलिए अहम है क्योंकि बिजली ग्रिड में थोड़ी-सी देरी भी व्यापक व्यवधान पैदा कर सकती है।
OT-IT अलगाव और भारत में डेटा भंडारण पर जोर
नियमों में ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (OT) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) प्रणालियों के बीच सख्त तार्किक या भौतिक अलगाव अनिवार्य किया गया है। OT वे प्रणालियाँ होती हैं जो बिजली ग्रिड जैसे भौतिक ढांचे को नियंत्रित करती हैं, जबकि IT प्रणालियाँ डेटा प्रोसेसिंग, संचार और व्यावसायिक कार्यों से जुड़ी होती हैं।
इसके अलावा संवेदनशील परिचालन और ऐतिहासिक डेटा को एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित वातावरण में भारत के भीतर ही संग्रहीत करना होगा। यही शर्त उन थर्ड-पार्टी क्लाउड सेवा प्रदाताओं पर भी लागू होगी, जो बिजली क्षेत्र की संस्थाओं का डेटा संभालते हैं। इससे डेटा सुरक्षा, निगरानी और संप्रभु नियंत्रण को मजबूती मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- CEA ने ये नियम Electricity Act, 2003 के तहत अधिसूचित किए हैं।
- CSIRT-Power की स्थापना अप्रैल 2023 में बिजली क्षेत्र की साइबर घटनाओं से निपटने के लिए की गई थी।
- CERT-In भारत की राष्ट्रीय साइबर घटना प्रतिक्रिया एजेंसी है, जो Information Technology Act, 2000 के तहत काम करती है।
- Operational Technology (OT) वे प्रणालियाँ हैं जो बिजली ग्रिड जैसी भौतिक अवसंरचना को नियंत्रित करती हैं।
बिजली क्षेत्र पर बढ़ते साइबर खतरे को देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के समय में इस क्षेत्र ने बड़ी संख्या में हमले रोके हैं, जिससे यह साफ है कि ऊर्जा सुरक्षा अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मुद्दा बन चुकी है।