होकाटो होटोजे सेमा बने पुरुष शॉट पुट F57 वर्ग में विश्व नंबर-1
भारत के पैरा एथलीट और भारतीय सेना की 9 असम रेजिमेंट में सूबेदार होकाटो होटोजे सेमा ने 2 जुलाई 2026 को पुरुषों की शॉट पुट F57 श्रेणी में विश्व नंबर-1 रैंकिंग हासिल कर देश का गौरव बढ़ाया। नागालैंड के रहने वाले सेमा ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका यह सफर साहस, दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत का प्रेरणादायक उदाहरण है।
होकाटो होटोजे सेमा का खेल सफर
होकाटो होटोजे सेमा ने वर्ष 2002 में एक सैन्य अभियान के दौरान लैंडमाइन विस्फोट में अपना बायाँ पैर खो दिया था। इस कठिन हादसे के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और 32 वर्ष की आयु में शॉट पुट खेलना शुरू किया। अपनी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया तथा भारत के प्रमुख पैरा खिलाड़ियों में स्थान बनाया।
शॉट पुट F57 वर्ग क्या है?
F57 पैरा एथलेटिक्स की एक फील्ड वर्गीकरण श्रेणी है, जिसमें निचले अंगों से संबंधित दिव्यांगता वाले खिलाड़ी बैठकर थ्रो प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। पैरा एथलेटिक्स में वर्गीकरण प्रणाली का उद्देश्य समान प्रकार और स्तर की दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है। इस श्रेणी में शॉट पुट के अलावा डिस्कस थ्रो और भाला फेंक जैसी स्पर्धाएँ भी आयोजित की जाती हैं।
पेरिस 2024 पैरालंपिक में ऐतिहासिक प्रदर्शन
पेरिस 2024 पैरालंपिक में होकाटो होटोजे सेमा ने पुरुषों की शॉट पुट F57 स्पर्धा में 14.65 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता। यह प्रतियोगिता 6 सितंबर 2024 को फ्रांस के स्टेड डी फ्रांस स्टेडियम में आयोजित हुई थी। इस स्पर्धा में ईरान के यासिन खोस्रावी ने 15.96 मीटर के साथ स्वर्ण पदक, जबकि ब्राज़ील के थियागो पाउलिनो दोस सांतोस ने 15.06 मीटर के साथ रजत पदक अपने नाम किया। सेमा का यह कांस्य पदक भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जाता है और इसी प्रदर्शन ने उन्हें विश्व स्तर पर शीर्ष खिलाड़ियों की श्रेणी में स्थापित किया।
सम्मान और प्रमुख उपलब्धियाँ
होकाटो होटोजे सेमा भारत के पहले पैरालंपियन हैं जिन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। इसके अतिरिक्त उन्हें खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अर्जुन पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2022 में हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों में कांस्य पदक तथा मोरक्को ग्रां प्री में रजत पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। विश्व नंबर-1 बनने की उपलब्धि उनके वर्षों के समर्पण और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है तथा यह भारतीय पैरा खेलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- F57 वर्ग पैरा एथलेटिक्स में निचले अंगों से संबंधित दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के लिए निर्धारित फील्ड श्रेणी है।
- पेरिस 2024 पैरालंपिक की एथलेटिक्स प्रतियोगिताएँ फ्रांस के स्टेड डी फ्रांस स्टेडियम में आयोजित की गई थीं।
- अर्जुन पुरस्कार भारत सरकार द्वारा खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है।
- अति विशिष्ट सेवा पदक भारतीय सशस्त्र बलों का शांतिकाल में विशिष्ट सेवाओं के लिए दिया जाने वाला उच्च सैन्य अलंकरण है।
होकाटो होटोजे सेमा की उपलब्धियाँ यह सिद्ध करती हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम से किसी भी चुनौती को सफलता में बदला जा सकता है। विश्व नंबर-1 बनने की उनकी उपलब्धि न केवल भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि यह देश के युवाओं और खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।