विश्व रोइंग कप में भारत का पहला स्वर्ण, सेना के जवानों ने रचा इतिहास

विश्व रोइंग कप में भारत का पहला स्वर्ण, सेना के जवानों ने रचा इतिहास

भारतीय रोइंग के इतिहास में 27 जून 2026 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया, जब भारतीय सेना के हवलदार लक्षय और हवलदार उज्ज्वल कुमार सिंह ने विश्व रोइंग कप स्टेज-3 में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दोनों खिलाड़ियों ने लाइटवेट मेंस डबल स्कल्स (एलएम2एक्स) स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम विश्व मंच पर रोशन किया। यह उपलब्धि भारतीय रोइंग के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है।

विश्व रोइंग कप में ऐतिहासिक सफलता

विश्व रोइंग कप, रोइंग खेल की अंतरराष्ट्रीय संचालन संस्था वर्ल्ड रोइंग द्वारा आयोजित वार्षिक प्रतियोगिता है। इसमें दुनिया के शीर्ष रोअर्स विभिन्न चरणों में अलग-अलग देशों में आयोजित मुकाबलों में भाग लेते हैं। इस प्रतियोगिता में सिंगल स्कल्स, डबल स्कल्स और कॉक्सलेस फोर्स जैसी कई स्पर्धाएं आयोजित की जाती हैं। भारत के लिए पहली बार इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतना देश की बढ़ती खेल क्षमता का प्रमाण है। यह उपलब्धि भविष्य में भारतीय रोइंग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

लाइटवेट मेंस डबल स्कल्स में शानदार प्रदर्शन

लाइटवेट मेंस डबल स्कल्स ऐसी स्पर्धा है जिसमें दो खिलाड़ी एक नाव में बैठकर प्रतिस्पर्धा करते हैं और प्रत्येक खिलाड़ी दो चप्पुओं का उपयोग करता है। इस वर्ग में खिलाड़ियों के लिए निर्धारित वजन सीमा का पालन करना अनिवार्य होता है। लक्षय और उज्ज्वल कुमार सिंह ने 6 मिनट 26.09 सेकंड का समय निकालते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। हांगकांग की टीम 6:27.14 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि नीदरलैंड 6:27.36 के साथ तीसरे स्थान पर रहा। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और अंतिम परिणाम फोटो फिनिश के आधार पर तय हुआ।

भारतीय सेना की अहम भूमिका

दोनों स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी भारतीय सेना में हवलदार के पद पर कार्यरत हैं और पुणे स्थित आर्मी रोइंग नोड से प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। प्रतियोगिता में भारत का 18 सदस्यीय दल शामिल था, जिसमें 17 खिलाड़ी भारतीय सेना तथा एक खिलाड़ी भारतीय नौसेना से था। यह तथ्य दर्शाता है कि भारतीय सशस्त्र बल खेल प्रतिभाओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भारतीय दल विश्व कप के दूसरे चरण में वीजा संबंधी समस्याओं के कारण हिस्सा नहीं ले सका था, जबकि स्विट्जरलैंड के लिए वीजा प्रतियोगिता से केवल पांच दिन पहले प्राप्त हुए थे। इसके बावजूद खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • विश्व रोइंग कप का आयोजन हर वर्ष वर्ल्ड रोइंग द्वारा विभिन्न देशों में किया जाता है।
  • ल्यूसर्न, स्विट्जरलैंड का प्रमुख शहर है और अंतरराष्ट्रीय रोइंग प्रतियोगिताओं का नियमित मेजबान माना जाता है।
  • स्कलिंग स्पर्धा में प्रत्येक खिलाड़ी दो चप्पुओं का उपयोग करता है, जबकि स्वीप रोइंग में एक खिलाड़ी केवल एक चप्पू चलाता है।
  • पुणे स्थित आर्मी रोइंग नोड भारत में सैन्य खिलाड़ियों के लिए प्रमुख रोइंग प्रशिक्षण केंद्रों में से एक है।

भारत की यह ऐतिहासिक जीत केवल एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में रोइंग खेल के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की मेहनत का प्रतीक है। हवलदार लक्षय और हवलदार उज्ज्वल कुमार सिंह की उपलब्धि आने वाले वर्षों में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी और भारतीय रोइंग को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Originally written on June 30, 2026 and last modified on June 30, 2026.

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