एस. अश्वथ बने भारत के 98वें शतरंज ग्रैंडमास्टर
तमिलनाडु के नागरकोइल के 17 वर्षीय युवा शतरंज खिलाड़ी एस. अश्वथ ने 8 जुलाई 2026 को भारत के 98वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने जुलाई 2026 में आयोजित पुणे इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर टूर्नामेंट में अपना तीसरा और अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल कर यह उपलब्धि अपने नाम की। अश्वथ की इस सफलता ने भारतीय शतरंज जगत में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है और देश की युवा प्रतिभाओं की बढ़ती ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है।
ग्रैंडमास्टर बनने की कठिन राह
शतरंज में ग्रैंडमास्टर (जीएम) की उपाधि विश्व शतरंज महासंघ (फिडे) द्वारा प्रदान की जाती है। यह शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित उपाधियों में से एक मानी जाती है। इसे प्राप्त करने के लिए किसी खिलाड़ी को तीन ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल करने के साथ-साथ फिडे रेटिंग में 2500 या उससे अधिक अंक प्राप्त करना अनिवार्य होता है। यह उपलब्धि केवल लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ही मिलती है।
पुणे इंटरनेशनल टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन
पुणे इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर राउंड रॉबिन टूर्नामेंट में एस. अश्वथ ने नौ दौर में सात अंक अर्जित कर दूसरा स्थान हासिल किया। अंतिम दौर में उन्होंने अमेरिका के एफएम कन्नन वैद्यनाथन को काले मोहरों से खेलते हुए हराया। इस जीत के साथ उन्होंने अपना तीसरा और अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म पूरा कर लिया, जिसके बाद वह आधिकारिक रूप से भारत के 98वें ग्रैंडमास्टर बन गए।
लगातार मेहनत से मिली सफलता
अश्वथ ने अपना पहला ग्रैंडमास्टर नॉर्म वर्ष 2025 में ग्रेंके ओपन प्रतियोगिता में हासिल किया था। इसके बाद दिसंबर 2025 में बुडापेस्ट में आयोजित फर्स्ट सैटरडे ग्रैंडमास्टर राउंड रॉबिन टूर्नामेंट में दूसरा नॉर्म प्राप्त किया और इसी दौरान उन्होंने 2500 फिडे रेटिंग का महत्वपूर्ण आंकड़ा भी पार कर लिया। उल्लेखनीय है कि उन्होंने कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए लगभग छह महीने तक क्लासिकल शतरंज से भी विराम लिया था, लेकिन वापसी के बाद शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना सपना पूरा कर लिया।
तमिलनाडु और भारत के लिए गौरव
एस. अश्वथ तमिलनाडु के 38वें ग्रैंडमास्टर बने हैं। उन्होंने अपने पिता और कोच ए.सी. शिवा द्वारा संचालित केप चेस अकादमी में शतरंज की शुरुआती शिक्षा प्राप्त की। उनकी उपलब्धि के साथ भारत में ग्रैंडमास्टरों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है। अब भारत 100 ग्रैंडमास्टरों के ऐतिहासिक आंकड़े से केवल दो कदम दूर है। उल्लेखनीय है कि अश्वथ की उपलब्धि से पहले 12 दिनों के भीतर तीन अन्य भारतीय खिलाड़ियों ने भी ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ग्रैंडमास्टर की उपाधि विश्व शतरंज महासंघ (फिडे) द्वारा प्रदान की जाती है।
- ग्रैंडमास्टर बनने के लिए तीन जीएम नॉर्म और कम से कम 2500 फिडे रेटिंग आवश्यक होती है।
- एस. अश्वथ भारत के 98वें और तमिलनाडु के 38वें शतरंज ग्रैंडमास्टर बने हैं।
- उन्होंने शतरंज का प्रशिक्षण अपने पिता ए.सी. शिवा द्वारा संचालित केप चेस अकादमी से प्राप्त किया।
एस. अश्वथ की उपलब्धि भारतीय शतरंज के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। कम उम्र में कठिन मानकों को पूरा कर ग्रैंडमास्टर बनना उनकी प्रतिभा, अनुशासन और निरंतर मेहनत का परिणाम है। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी।