हरि बाबू कंभमपति बने ओडिशा के 27वें राज्यपाल
हरि बाबू कंभमपति ने 3 जनवरी 2025 को ओडिशा के 27वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की। भुवनेश्वर स्थित राजभवन में आयोजित समारोह में ओडिशा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने रघुबर दास का स्थान लिया, जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
राज्यपाल का संवैधानिक पद
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल होता है, जो राज्य का संवैधानिक प्रमुख माना जाता है। राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 155 के तहत की जाती है। अनुच्छेद 156 के अनुसार राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर बने रहते हैं। राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल के नाम पर संचालित होती है, जबकि वास्तविक प्रशासन मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद द्वारा चलाया जाता है।
शपथ ग्रहण और संवैधानिक प्रावधान
राज्यपाल के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 159 में वर्णित है। इस अनुच्छेद के अनुसार राज्यपाल को पद की शपथ संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं। यदि मुख्य न्यायाधीश उपलब्ध न हों, तो वरिष्ठतम न्यायाधीश यह जिम्मेदारी निभाते हैं। हरि बाबू कंभमपति का शपथ ग्रहण समारोह भी इसी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आयोजित किया गया।
हरि बाबू कंभमपति का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव
हरि बाबू कंभमपति इससे पहले मिजोरम के राज्यपाल के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 24 दिसंबर 2024 को उन्हें ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया था। उनके पास लंबे समय का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव है, जिसे ओडिशा के शासन और प्रशासन में उपयोगी माना जा रहा है।
श्री जगन्नाथ मंदिर का दर्शन
राज्यपाल पद संभालने से पहले हरि बाबू कंभमपति ने पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में दर्शन किए। यह मंदिर हिंदू धर्म के चार धाम तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है और भगवान जगन्नाथ को समर्पित है। मंदिर ओडिशा की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” ओडिशा राज्य का गठन 1 अप्रैल 1936 को हुआ था। ” ओडिशा को पहले आधिकारिक रूप से उड़ीसा कहा जाता था। ” राज्यपाल की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत होती है। ” श्री जगन्नाथ मंदिर हिंदू धर्म के चार धामों में शामिल है। हरि बाबू कंभमपति का राज्यपाल बनना ओडिशा की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। संवैधानिक प्रमुख के रूप में उनकी भूमिका राज्य सरकार और केंद्र के बीच समन्वय बनाए रखने में अहम होगी।