गुजरात में डिजिटल लाइब्रेरी नेटवर्क से ग्रामीण पाठन को नई रफ्तार

गुजरात में डिजिटल लाइब्रेरी नेटवर्क से ग्रामीण पाठन को नई रफ्तार

गुजरात के गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में ग्रामीण पाठन संस्कृति को मजबूत करने के लिए ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया। इस पहल के जरिए गांवों की लाइब्रेरियों को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है, ताकि किताबों की उपलब्धता, मांग और वितरण की व्यवस्था अधिक सुगम हो सके। यह लॉन्च राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस के अवसर पर हुआ, जो भारत में पुस्तकालय विज्ञान के अग्रणी एस. आर. रंगनाथन की जयंती पर मनाया जाता है।

डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी गांवों की लाइब्रेरियां

यह परियोजना हब-एंड-स्पोक मॉडल पर आधारित है, जिसमें छोटी गांव लाइब्रेरियों को चार केंद्रीय लाइब्रेरियों से जोड़ा गया है। इन केंद्रीय लाइब्रेरियों में मिलाकर लगभग 2.80 लाख पुस्तकें उपलब्ध हैं। अधिकारियों के अनुसार, सिस्टम विकसित होने के तीन महीने के भीतर 752 लाइब्रेरियों को आपस में जोड़ा जा चुका है।

इस मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकें केवल एक स्थान तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत के अनुसार गांवों तक पहुंचाई जा सकें। इससे छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों और सामान्य पाठकों को एक साझा डिजिटल मंच पर पुस्तक खोजने और मंगाने की सुविधा मिलेगी।

63 गांव लाइब्रेरियों से शुरू हुई पहल

शुरुआती चरण में यह परियोजना गांधीनगर, कालोल और साणंद विधानसभा क्षेत्रों की 63 गांव लाइब्रेरियों को कवर कर रही है। प्रत्येक लाइब्रेरी में 4,500 से 6,000 पुस्तकों की उपलब्धता का लक्ष्य रखा गया है। कुछ रिपोर्टों में प्रति लाइब्रेरी 5,000 से 6,000 पुस्तकों की व्यवस्था का उल्लेख भी किया गया है।

पुस्तक संग्रह में बच्चों के लिए सामग्री, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी किताबें, तथा भारत, गुजरात और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास पर आधारित पुस्तकें शामिल हैं। इससे यह पहल केवल पढ़ने की आदत बढ़ाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शैक्षिक और ज्ञानवर्धक संसाधनों की पहुंच भी बढ़ाती है।

मोबाइल लाइब्रेरी वैन से किताबें पहुंचेंगी गांवों तक

इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए MPLAD अनुदान से चार मोबाइल लाइब्रेरी वैन भी चलाई जाएंगी। ये वैन हर पखवाड़े गांवों का दौरा करेंगी, जारी की गई किताबें वापस लेंगी और ऐप के जरिए मांगी गई नई किताबें पहुंचाएंगी।

यह व्यवस्था ग्रामीण इलाकों में पुस्तकालयों की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ती है और किताबों को एक गतिशील सेवा में बदल देती है। डिजिटल ऐप, केंद्रीय पुस्तक भंडार और मोबाइल वैन का यह संयोजन ग्रामीण शिक्षा और पठन संस्कृति के लिए एक व्यावहारिक मॉडल माना जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस भारत में 12 अगस्त को मनाया जाता है।
  • यह दिन एस. आर. रंगनाथन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिन्हें भारत में पुस्तकालय विज्ञान का जनक माना जाता है।
  • एस. आर. रंगनाथन की प्रसिद्ध अवधारणा ‘पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियम’ है।
  • MPLAD का पूरा नाम Member of Parliament Local Area Development Scheme है।

गांधीनगर क्षेत्र में शुरू हुई यह पहल ग्रामीण भारत में डिजिटल पुस्तकालय नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पढ़ने की सुविधा, ज्ञान तक पहुंच और स्थानीय स्तर पर शैक्षिक संसाधनों की उपलब्धता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Originally written on August 13, 2026 and last modified on August 13, 2026.

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