स्वदेशी 80 एमएम एयरो रॉकेट
भारतीय नौसेना ने मिग-29के और मिग-29केयूबी लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी 80 एमएम एयरो रॉकेट विकसित करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। यह पहल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और आयातित हथियारों पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से जुड़ी है।
मिग-29के बेड़े के लिए नई पहल
मिग-29के भारतीय नौसेना का कैरियर-आधारित बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जो विमानवाहक पोतों से उड़ान भरने और उतरने में सक्षम है। इसका दो सीटों वाला संस्करण मिग-29केयूबी प्रशिक्षण और परिचालन अभ्यास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ये विमान आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत से संचालित होते हैं। नौसेना ने 26 मई 2026 को गोवा स्थित नेवल आर्मामेंट इंस्पेक्टरेट के माध्यम से भारतीय कंपनियों से अभिरुचि-पत्र मांगा है। इसका उद्देश्य 80 एमएम के अनगाइडेड एयर-टू-ग्राउंड रॉकेट का डिजाइन, विकास और निर्माण देश में ही कराना है।
80 एमएम रॉकेट की विशेषताएं
प्रस्तावित रॉकेट का वजन लगभग 11.3 किलोग्राम और लंबाई करीब 1.54 मीटर निर्धारित की गई है। इसकी गति लगभग 600 मीटर प्रति सेकंड होनी चाहिए। यह रॉकेट 1.3 किलोमीटर से 4 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम होगा। रॉकेट से 400 मिलीमीटर तक के कवच को भेदने और कम से कम 400 टुकड़े पैदा करने की क्षमता अपेक्षित है। इसे माइनस 60 डिग्री सेल्सियस से प्लस 60 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम करने योग्य बनाया जाना है। इसकी शेल्फ लाइफ कम से कम 15 वर्ष मांगी गई है।
प्रशिक्षण और खरीद योजना
नौसेना ने पायलटों के अभ्यास के लिए ऐसा प्रैक्टिस राउंड भी मांगा है, जिसकी उड़ान विशेषताएं वास्तविक रॉकेट जैसी हों, लेकिन उसमें वारहेड न हो। परीक्षण और प्रोटोटाइप विकास के बाद प्रारंभिक रूप से 273 लाइव हाई-एक्सप्लोसिव रॉकेट और 2,400 प्रैक्टिस राउंड खरीदने की योजना है। कंपनियों को 20 जून 2026 तक अपना जवाब नेवल आर्मामेंट इंस्पेक्टरेट, गोवा को भेजना होगा। इस प्रणाली को 2026-27 के दौरान शामिल किए जाने की संभावना जताई गई है।
आत्मनिर्भर भारत से जुड़ा महत्व
यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में स्थानीय क्षमता बढ़ाने का उदाहरण है। स्वदेशी रॉकेट बनने से नौसेना को आपूर्ति श्रृंखला पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा, विदेशी निर्भरता कम होगी और युद्धक तैयारी मजबूत होगी। साथ ही भारतीय रक्षा उद्योग को उन्नत हथियार निर्माण में नई तकनीकी क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 80 एमएम एयरो रॉकेट एक अनगाइडेड एयर-टू-ग्राउंड हथियार है।
- मिग-29के रूस में विकसित कैरियर-आधारित लड़ाकू विमान है।
- आईएनएस विक्रमादित्य को भारतीय नौसेना में 2013 में शामिल किया गया था।
- आईएनएस विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है, जिसे 2022 में कमीशन किया गया था।
स्वदेशी 80 एमएम एयरो रॉकेट परियोजना भारतीय नौसेना की मारक क्षमता, प्रशिक्षण दक्षता और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को मजबूत कर सकती है। यह पहल भारत की समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी सैन्य तकनीक दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।