एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित बने भारतीय वायुसेना के अगले उप वायुसेना प्रमुख
भारतीय वायुसेना में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के तहत एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 5 जून 2026 को अगले उप वायुसेना प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ – VCAS) के रूप में नियुक्त किया गया है। वे 1 जुलाई 2026 को अपना पदभार ग्रहण करेंगे। इस पद पर वे एयर मार्शल नागेश कपूर का स्थान लेंगे, जिन्होंने 1 जनवरी 2026 को उप वायुसेना प्रमुख का कार्यभार संभाला था। यह नियुक्ति भारतीय वायुसेना के नेतृत्व ढांचे में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
उप वायुसेना प्रमुख का महत्व
उप वायुसेना प्रमुख भारतीय वायुसेना का एक वरिष्ठ तीन-स्टार रैंक का पद होता है। यह पद वायुसेना प्रमुख के अधीन कार्य करता है और नई दिल्ली स्थित एयर मुख्यालय की प्रमुख प्रशासनिक एवं संचालनात्मक संरचना का हिस्सा होता है। उप वायुसेना प्रमुख वायुसेना की नीतियों, आधुनिकीकरण योजनाओं, संसाधन प्रबंधन और संचालनात्मक तैयारियों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में योगदान देता है।
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का सैन्य करियर
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की लड़ाकू शाखा में कमीशन प्राप्त हुआ था। अपने लंबे और प्रतिष्ठित सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उप वायुसेना प्रमुख नियुक्त होने से पहले वे 1 मई 2025 से मुख्यालय, एकीकृत रक्षा स्टाफ में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर कार्यरत थे। इस भूमिका में उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त सैन्य योजना निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उड़ान अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता
एयर मार्शल दीक्षित भारतीय वायुसेना के सबसे अनुभवी लड़ाकू और परीक्षण पायलटों में गिने जाते हैं। उनके पास 3,300 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है, जो उनकी पेशेवर दक्षता और संचालनात्मक विशेषज्ञता को दर्शाता है। उन्होंने 20 से अधिक प्रकार के विमानों का संचालन किया है, जिनमें मिराज-2000, मिग-21 और जगुआर जैसे प्रमुख लड़ाकू विमान शामिल हैं। उनकी तकनीकी समझ और उड़ान कौशल ने उन्हें वायुसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर दिया।
आधुनिकीकरण और स्वदेशी परियोजनाओं में योगदान
एयर मार्शल दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के स्वदेशी उन्नयन कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने जगुआर और मिग-27 विमानों के अपग्रेडेशन कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा वे मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) कार्यक्रम से जुड़े परीक्षणों और मूल्यांकन प्रक्रियाओं में भी शामिल रहे हैं। उन्होंने सशस्त्र बलों के बीच “जॉइंटनेस” अर्थात संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत बनाने के प्रयासों में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- उप वायुसेना प्रमुख भारतीय वायुसेना के सर्वोच्च पदों में से एक माना जाता है।
- चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य समन्वय और योजना निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- मिराज-2000, मिग-21 और जगुआर भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमान रहे हैं।
- मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) कार्यक्रम भारत की लड़ाकू विमान खरीद और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण रक्षा कार्यक्रम है।
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित की नियुक्ति भारतीय वायुसेना के लिए अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता और नेतृत्व क्षमता का एक महत्वपूर्ण संगम प्रस्तुत करती है। उनके व्यापक उड़ान अनुभव, आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में योगदान और संयुक्त सैन्य संचालन की समझ से वायुसेना की भविष्य की रणनीतिक तैयारियों और क्षमताओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।