स्कॉटलैंड में पहली बार मिला उसुतु वायरस, ब्लैकबर्ड पक्षियों में संक्रमण की पुष्टि
स्कॉटलैंड में पहली बार उसुतु वायरस (Usutu Virus – USUV) की पहचान ब्लैकबर्ड पक्षियों में की गई है। यह खोज 2025 की गर्मियों में हुई थी, जबकि इसकी आधिकारिक घोषणा 1 अप्रैल 2026 को की गई। वायरस की पुष्टि स्कॉटलैंड के आइल ऑफ एरन (Isle of Arran) क्षेत्र में मृत और बीमार ब्लैकबर्ड पक्षियों के नमूनों की जांच के बाद हुई। यह घटना यूरोप में इस वायरस के विस्तार और वन्यजीव स्वास्थ्य निगरानी के महत्व को रेखांकित करती है।
क्या है उसुतु वायरस?
उसुतु वायरस एक मच्छर जनित फ्लैविवायरस (Flavivirus) है। यह मुख्य रूप से मच्छरों के माध्यम से फैलता है और जंगली पक्षियों, विशेषकर ब्लैकबर्ड्स, को संक्रमित करता है। वायरस की पहली पहचान अफ्रीका में हुई थी, जिसके बाद यह यूरोप के कई देशों में भी पाया गया। हालांकि यह मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन दुर्लभ मामलों में मनुष्यों में भी संक्रमण दर्ज किया गया है।
स्कॉटलैंड में कैसे हुई पहचान?
आइल ऑफ एरन के स्थानीय निवासियों ने कुछ ब्लैकबर्ड पक्षियों में तंत्रिका तंत्र संबंधी लक्षण (Neurological Signs) और मृत पक्षियों की सूचना दी थी। इसके बाद यूनाइटेड किंगडम की एनिमल एंड प्लांट हेल्थ एजेंसी (APHA) के राष्ट्रीय निष्क्रिय जंगली पक्षी निगरानी कार्यक्रम के अंतर्गत जांच की गई। रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन-पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन (RT-PCR) तकनीक के माध्यम से दो ब्लैकबर्ड पक्षियों में उसुतु वायरस का आरएनए पाया गया, जिससे संक्रमण की पुष्टि हुई।
अनुसंधान संस्थानों की भूमिका
इस जांच में कई संस्थानों ने संयुक्त रूप से कार्य किया, जिनमें शामिल हैं—
- APHA का वेक्टर-बोर्न डिजीज ग्रुप
- SRUC वेटरनरी सर्विसेज
- यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो का मच्छर स्कॉटलैंड अनुसंधान कार्यक्रम
इन संस्थाओं के सहयोग से वायरस की पहचान और आनुवंशिक विश्लेषण किया गया।
आनुवंशिक विश्लेषण से क्या पता चला?
वैज्ञानिकों द्वारा किए गए फाइलोजेनेटिक विश्लेषण (Phylogenetic Analysis) में पाया गया कि स्कॉटलैंड में मिले वायरस के नमूने अफ्रीका 3.2 वंश (Africa 3.2 Lineage) से संबंधित हैं। इस प्रकार का विश्लेषण वायरस की विभिन्न किस्मों के बीच संबंधों और उनके भौगोलिक प्रसार को समझने के लिए किया जाता है। अध्ययन से संकेत मिला कि यह संक्रमण ब्रिटेन में पहले से मौजूद उसुतु वायरस के प्रसार का हिस्सा है, न कि किसी नए स्वतंत्र प्रवेश का परिणाम।
पक्षियों पर प्रभाव
उसुतु वायरस ने यूरोप के कई क्षेत्रों में ब्लैकबर्ड आबादी को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस पक्षियों में तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है और कई मामलों में उनकी मृत्यु का कारण बन सकता है। दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड में यह वायरस पिछले छह वर्षों से सक्रिय है, जहां मच्छरों द्वारा इसका प्रसार दर्ज किया गया है।
मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम बहुत कम है। अब तक यूनाइटेड किंगडम में मनुष्यों में इस वायरस का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि यूरोप के कुछ देशों में मानव संक्रमण के सीमित मामले सामने आए हैं। अधिकांश मानव संक्रमण या तो बिना लक्षण वाले होते हैं या बहुत हल्के लक्षण उत्पन्न करते हैं।
निगरानी और रोग नियंत्रण
ब्रिटेन में मृत या बीमार पक्षियों की निगरानी को वन्यजीव रोग नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस प्रकार की निगरानी से उसुतु वायरस और वेस्ट नाइल वायरस जैसे मच्छर जनित रोगों की समय रहते पहचान की जा सकती है और उनके प्रसार को समझने में मदद मिलती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- उसुतु वायरस एक मच्छर जनित फ्लैविवायरस है।
- यह मुख्य रूप से जंगली पक्षियों, विशेषकर ब्लैकबर्ड्स, को प्रभावित करता है।
- स्कॉटलैंड में पहली बार इसकी पुष्टि 2025 में हुई और घोषणा 1 अप्रैल 2026 को की गई।
- संक्रमण आइल ऑफ एरन क्षेत्र में पाया गया।
- वायरस की पहचान RT-PCR तकनीक द्वारा की गई।
- फाइलोजेनेटिक विश्लेषण से वायरस की Africa 3.2 वंशावली की पुष्टि हुई।
- यूनाइटेड किंगडम में अब तक मानव संक्रमण का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।
- APHA ब्रिटेन में पक्षी रोगों की राष्ट्रीय निगरानी प्रणाली संचालित करती है।
स्कॉटलैंड में उसुतु वायरस की पहचान वन्यजीव स्वास्थ्य निगरानी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज है। यद्यपि वर्तमान में मानव स्वास्थ्य के लिए इसका खतरा बहुत कम माना जा रहा है, फिर भी यह घटना मच्छर जनित रोगों की निगरानी और जैव विविधता संरक्षण के महत्व को उजागर करती है।