डिजिटल इंडिया भाषिणी और GeM के बीच समझौता, सार्वजनिक खरीद प्रणाली में बढ़ेगी बहुभाषी पहुंच
डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (BHASHINI Division) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने 15 जून 2026 को भारत की सार्वजनिक खरीद प्रणाली को अधिक समावेशी और बहुभाषी बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग के तहत भाषिणी प्लेटफॉर्म की भाषा प्रौद्योगिकी क्षमताओं को GeM पोर्टल के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे देशभर के उपयोगकर्ता अपनी पसंदीदा भारतीय भाषाओं में सरकारी खरीद सेवाओं तक पहुंच सकेंगे।
क्या है भाषिणी प्लेटफॉर्म?
भाषिणी (BHASHINI) डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित भारत का राष्ट्रीय भाषा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (National Language Digital Public Infrastructure) है। इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं में डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाना है। भाषिणी प्लेटफॉर्म अनुवाद, वाक् पहचान (Speech Recognition), वॉइस-आधारित संवाद और अन्य भाषा प्रौद्योगिकी सेवाएं प्रदान करता है। यह पहल देश की भाषाई विविधता को डिजिटल दुनिया से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है।
सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) क्या है?
GeM भारत सरकार का ऑनलाइन सार्वजनिक खरीद पोर्टल है, जहां विभिन्न मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक उपक्रम और अन्य सरकारी संस्थाएं वस्तुओं और सेवाओं की खरीद करती हैं। यह पोर्टल पारदर्शी, तेज और डिजिटल खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है। GeM पर लाखों विक्रेता, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) तथा अन्य व्यवसाय पंजीकृत हैं।
समझौते की प्रमुख विशेषताएं
यह साझेदारी “BHASHINI for Seva/Sanchalan – A BHASHINI Sahayogi Program” के अंतर्गत संचालित होगी। इसके तहत GeM प्लेटफॉर्म में कई उन्नत तकनीकी सुविधाओं का समावेश किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भाषा तकनीक
- अनुवाद एपीआई (Translation APIs)
- क्षेत्र-विशिष्ट भाषा मॉडल
- वॉइस-आधारित डिजिटल उपकरण
- जनरेटिव एआई समाधान
इन तकनीकों के माध्यम से उपयोगकर्ता विभिन्न भारतीय भाषाओं में GeM सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे।
22 भारतीय भाषाओं में सेवाएं
परियोजना का उद्देश्य संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल सेवाओं को सक्षम बनाना है। “वॉइस फर्स्ट” तकनीक के माध्यम से उपयोगकर्ता बोलकर भी सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म अधिक सुलभ और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनेंगे।
सार्वजनिक खरीद प्रणाली को मिलेगा लाभ
सार्वजनिक खरीद (Public Procurement) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सरकारी संस्थाएं वस्तुओं और सेवाओं की खरीद करती हैं। बहुभाषी सुविधा उपलब्ध होने से विभिन्न राज्यों और भाषाई क्षेत्रों के व्यवसायों को GeM का उपयोग करने में आसानी होगी। इससे विशेष रूप से MSME, स्टार्टअप और छोटे व्यापारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो भाषा संबंधी बाधाओं के कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म का पूरा उपयोग नहीं कर पाते थे।
डिजिटल समावेशन की दिशा में कदम
भारत जैसे बहुभाषी देश में डिजिटल सेवाओं को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराना डिजिटल समावेशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पहल न केवल सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाएगी, बल्कि डिजिटल शासन (Digital Governance) को भी मजबूत करेगी। साथ ही, क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देकर डिजिटल अर्थव्यवस्था में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करेगी।
जनरेटिव एआई की भूमिका
इस परियोजना में जनरेटिव एआई तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो पाठ, भाषण और अन्य डिजिटल सामग्री तैयार करने में सक्षम होती है। यह तकनीक भाषा अनुवाद, संवाद प्रणाली और उपयोगकर्ता सहायता सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भाषिणी और GeM के बीच समझौता 15 जून 2026 को हुआ।
- भाषिणी डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय भाषा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना है।
- GeM भारत सरकार का ऑनलाइन सार्वजनिक खरीद पोर्टल है।
- परियोजना 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखती है।
- “BHASHINI for Seva/Sanchalan” इस सहयोग का संचालन कार्यक्रम है।
- जनरेटिव एआई का उपयोग भाषा आधारित डिजिटल सेवाओं के लिए किया जाएगा।
- भारत में 22 भाषाएं संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त हैं।
- GeM पर MSME, स्टार्टअप और अन्य व्यवसाय सरकारी खरीद प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
भाषिणी और GeM के बीच यह सहयोग भारत की बहुभाषी डिजिटल शासन व्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम है। इससे सरकारी खरीद प्रणाली अधिक समावेशी, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनेगी तथा देशभर के उद्यमियों और व्यवसायों को अपनी मातृभाषा में डिजिटल सेवाओं का लाभ प्राप्त होगा।