सोन नदी जल-बंटवारे पर बिहार-झारखंड समझौता, 25 साल पुराना विवाद खत्म
बिहार और झारखंड 31 अगस्त 2026 को सोन नदी के जल-बंटवारे पर औपचारिक समझौता करने जा रहे हैं। इस फैसले के साथ दोनों राज्यों के बीच 25 साल से चला आ रहा विवाद खत्म होगा, जो नवंबर 2000 में झारखंड के बिहार से अलग होने के बाद शुरू हुआ था। यह समझौता खास तौर पर सिंचाई, नदी-प्रबंधन और पूर्वी भारत की कृषि जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
सोन नदी के पानी का नया बंटवारा
तय सूत्र के अनुसार बिहार को 5.75 मिलियन एकड़-फीट (MAF) पानी मिलेगा, जबकि झारखंड को 2.0 MAF पानी का हिस्सा दिया गया है। कुल 7.75 MAF का यह आवंटन उसी हिस्से के बराबर है, जो 1973 के बाणसागर समझौते में अविभाजित बिहार के लिए तय किया गया था। इस तरह नया फार्मूला पुराने अधिकारों और नए राज्यीय ढांचे, दोनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
केंद्र की मध्यस्थता से बनी सहमति
इस विवाद के समाधान में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की भूमिका महत्वपूर्ण रही। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की अध्यक्षता वाली समिति ने बातचीत को आगे बढ़ाया और दोनों राज्यों के बीच सहमति बनाने में मदद की। एक बड़ा मोड़ 10 जुलाई 2025 को रांची में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में आया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी।
बिहार मंत्रिमंडल ने भी 13 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में इस मसौदा समझौते को मंजूरी दे दी थी। इससे स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकारें लंबे समय से लंबित इस मुद्दे को व्यावहारिक समाधान की ओर ले जाना चाहती हैं।
सिंचाई और क्षेत्रीय विकास पर असर
सोन नदी गंगा की एक प्रमुख दक्षिणी सहायक नदी है और पूर्वी भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह समझौता सोन नहर प्रणाली से जुड़ी सिंचाई योजनाओं को स्थिर आधार देगा। खासकर भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया और अरवल जैसे जिलों में सिंचाई व्यवस्था को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।
सोन नदी से जुड़े जल-वितरण का मुद्दा केवल दो राज्यों के बीच संसाधन बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नदी-घाटी प्रबंधन, कृषि उत्पादन और अंतर-राज्यीय सहयोग का भी उदाहरण है। ऐसे समझौते भविष्य में जल विवादों के समाधान के लिए एक मॉडल की तरह देखे जाते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सोन नदी गंगा की सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक नदियों में से एक मानी जाती है।
- केंद्रीय जल आयोग (CWC) जल शक्ति मंत्रालय के अधीन एक तकनीकी संस्था है।
- पूर्वी क्षेत्रीय परिषद में बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
- 1973 का बाणसागर समझौता मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अविभाजित बिहार के बीच हुआ था।
इस समझौते से न केवल जल-बंटवारे का पुराना विवाद सुलझेगा, बल्कि सोन नदी पर आधारित सिंचाई ढांचे को भी नई स्पष्टता मिलेगी। बिहार और झारखंड के लिए यह कदम प्रशासनिक सहमति और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।