भारत में शवगृहों के लिए पहली समान राष्ट्रीय व्यवस्था तय

भारत में शवगृहों के लिए पहली समान राष्ट्रीय व्यवस्था तय

भारत में शवगृह और पोस्टमॉर्टम ढांचे के लिए पहली बार एक समान न्यूनतम मानक तय किए गए हैं। राष्ट्रीय नैदानिक प्रतिष्ठान परिषद के तहत जारी इन मानकों का उद्देश्य शवों के सुरक्षित रखरखाव, पहचान, रिकॉर्ड-कीपिंग और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। ये नियम सरकारी और निजी, दोनों तरह के अस्पतालों पर लागू होंगे और इनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेशों की होगी।

शवगृहों के स्थान और संरचना पर सख्त नियम

नए मानकों के अनुसार शवगृह को बेसमेंट में नहीं बनाया जा सकेगा और न ही उसे अस्पताल के कचरा निस्तारण या डंपिंग क्षेत्र के पास रखा जाएगा। शवगृह परिसर का निर्माण ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए, ताकि शवों की आवाजाही सुरक्षित और अलग मार्ग से हो सके। इसके लिए सामान्य मरीजों की आवाजाही से अलग प्रवेश व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

यह व्यवस्था अस्पताल परिसर में संक्रमण नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और शवों की गरिमा बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही, शवों को लाने-ले जाने के लिए अलग रास्ता होने से अस्पताल संचालन भी अधिक व्यवस्थित रहेगा।

कोल्ड स्टोरेज, पहचान और रिकॉर्ड-कीपिंग

शवों के लिए बनाए जाने वाले कोल्ड स्टोरेज यूनिट में तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना होगा। प्रत्येक शवगृह में कम से कम चार शवों के भंडारण की क्षमता होनी चाहिए। हर शव को उसकी स्टोरेज कैबिन में एक अलग सीरियल नंबर दिया जाएगा, ताकि पहचान और ट्रैकिंग में कोई भ्रम न रहे।

मानकों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मेडिको-लीगल मामलों के शवों को गैर-मेडिको-लीगल शवों से अलग रखा जाएगा। इससे कस्टडी, पहचान और दस्तावेजी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी। पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच से जुड़े मामलों में यह अलगाव बेहद अहम माना जाता है।

पोस्टमॉर्टम ब्लॉक के लिए तय किए गए ढांचे

नए मानकों में पोस्टमॉर्टम ब्लॉक के लिए लगभग 4,000 वर्ग फुट क्षेत्रफल का प्रावधान किया गया है। इसमें करीब 2,000 वर्ग फुट का ऑपरेटरी एरिया, विसरा स्टोरेज, प्रतीक्षालय और प्रशासनिक कार्यालय शामिल होंगे। इसके अलावा कॉरिडोर की चौड़ाई कम से कम आठ फुट, छत की ऊंचाई कम से कम दस फुट और खिड़कियों पर मक्खी-रोधी बाहरी जाल होना जरूरी होगा। खिड़की की चौखट फर्श से कम से कम पांच फुट ऊंची रखनी होगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय नैदानिक प्रतिष्ठान परिषद, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अधीन कार्य करती है।
  • क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 इस तरह के मानकों के लिए कानूनी आधार देता है।
  • मेडिको-लीगल मामलों के शवों को शवगृह व्यवस्था में अलग रखा जाता है।
  • अस्पताल ढांचे में ग्राउंड फ्लोर पर सुविधाएं रखना सुरक्षा और संचालन की दृष्टि से सामान्य मानक माना जाता है।

इन मानकों के लागू होने से देशभर में शवगृह और पोस्टमॉर्टम सुविधाओं में एकरूपता आएगी। इससे अस्पतालों में पहचान, सुरक्षा, स्वच्छता और प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और मानकीकृत ढांचा मिलेगा।

Originally written on August 30, 2026 and last modified on August 30, 2026.

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