सूर्य के ध्रुवों की चमक का संबंध चुंबकीय क्षेत्र से
सूर्य के ध्रुवीय क्षेत्रों से निकलने वाली सूक्ष्मतरंग रेडियो चमक का संबंध वहां के चुंबकीय क्षेत्र से है। भारत और जापान के शोधकर्ताओं के संयुक्त अध्ययन में पाया गया कि इस चमक की तीव्रता ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति से सबसे अधिक निकटता रखती है। अध्ययन के निष्कर्ष सूर्य के ध्रुवों की बदलती गतिविधि और वहां मौजूद चुंबकीय संरचनाओं को समझने में मदद करते हैं।
तीन दशक के आंकड़ों का विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने जापान स्थित नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ से लगभग तीन दशकों तक 17 गीगाहर्ट्ज पर दर्ज सूर्य के रेडियो अवलोकनों का विश्लेषण किया। इन आंकड़ों की तुलना नासा के सौर गतिशीलता वेधशाला से मिले चरम पराबैंगनी प्रकाश के आंकड़ों और कैलिफोर्निया स्थित विलकॉक्स सौर वेधशाला के चुंबकीय क्षेत्र मापों से की गई। अलग-अलग प्रकार के अवलोकनों को साथ रखकर वैज्ञानिकों ने सौर ध्रुवों की गतिविधि का दीर्घकालिक अध्ययन किया।
सूक्ष्मतरंग ध्रुवीय चमक से आशय सूर्य के ध्रुवीय हिस्सों में रेडियो उत्सर्जन के अपेक्षाकृत अधिक होने से है। अध्ययन में इसकी तीव्रता और ध्रुवीय कोरोना छिद्रों के क्षेत्रफल के बीच मजबूत संबंध मिला। हालांकि, इसका संबंध सूर्य के ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति से और भी अधिक निकट पाया गया। शोध का नेतृत्व आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के रोहन बोस ने किया। टीम में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के उदयपुर सौर वेधशाला की अंशु कुमारी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के वैभव पंत शामिल थे।
कोरोना छिद्र और चमकीले बिंदु
कोरोना छिद्र सूर्य के बाहरी वायुमंडल, यानी कोरोना, के ऐसे क्षेत्र हैं जहां घनत्व और तापमान आसपास की तुलना में कम होते हैं। चरम पराबैंगनी और एक्स-किरणों की तस्वीरों में ये क्षेत्र गहरे दिखाई देते हैं। यहां की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं अंतरग्रहीय अंतरिक्ष की ओर खुलती हैं, इसलिए कोरोना छिद्र तेज गति वाली सौर पवन के प्रमुख स्रोत होते हैं।
शोध में सूक्ष्मतरंगों में चमकने वाले कई छोटे हिस्से कोरोना के चमकीले बिंदुओं से मेल खाते पाए गए। ये बिंदु सौर वायुमंडल में छोटे चुंबकीय लूपों से जुड़े होते हैं और ध्रुवीय कोरोना छिद्रों के भीतर आम तौर पर दिखाई देते हैं। इससे संकेत मिलता है कि रेडियो चमक को समझने के लिए बड़े पैमाने के ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र के साथ-साथ छोटी चुंबकीय संरचनाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।
दोनों ध्रुवों में अलग-अलग बदलाव
अध्ययन के अनुसार, समय के साथ सूक्ष्मतरंग चमक और ध्रुवीय कोरोना छिद्रों के क्षेत्रफल में हुए बदलाव उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में एक जैसे नहीं थे। शोधकर्ताओं ने इन परिवर्तनों को सूर्य के ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र और ध्रुवीय वायुमंडल की बदलती चुंबकीय बनावट से जोड़ा। इस तरह के दीर्घकालिक अवलोकन सौर गतिविधि के अलग-अलग चरणों को समझने में उपयोगी हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ जापान में स्थित सौर रेडियो वेधशाला है, जो 17 गीगाहर्ट्ज पर सूर्य का अवलोकन करता है।
- नासा का सौर गतिशीलता वेधशाला वर्ष 2010 में सूर्य के अध्ययन के लिए प्रक्षेपित किया गया था।
- विलकॉक्स सौर वेधशाला कैलिफोर्निया में स्थित है और सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र का मापन करती है।
- अध्ययन के निष्कर्ष अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित हुए।
रेडियो, चरम पराबैंगनी और चुंबकीय क्षेत्र के आंकड़ों को जोड़ने वाला यह अध्ययन दिखाता है कि सूर्य के ध्रुवों की चमक उसके चुंबकीय वातावरण में हो रहे बदलावों का महत्वपूर्ण संकेतक हो सकती है।