सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई 2026 को केंद्र सरकार की उस मांग को अस्वीकार कर दिया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया गया था। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की दो-न्यायाधीशों की पीठ इस मामले में कानून की संवैधानिक वैधता पर विचार कर रही है। यह मामला देश की चुनावी व्यवस्था और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दा बन गया है।

2023 का चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 इन पदों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल को नियंत्रित करता है। इस कानून के तहत चयन समिति की संरचना में बदलाव किया गया है, जिसमें अब प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं। इस अधिनियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर रखा गया है, जिसे लेकर याचिकाओं में संवैधानिक चुनौती दी गई है।

संवैधानिक पृष्ठभूमि

मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने निर्देश दिया था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश की समिति की सलाह पर की जाए। यह व्यवस्था तब तक लागू रहने वाली थी, जब तक संसद इस विषय पर कानून नहीं बना देती। अब 2023 के नए कानून के लागू होने के बाद यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या यह संविधान पीठ के निर्देशों के अनुरूप है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का महत्व

सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सबरीमाला मामले में व्यस्तता का हवाला देते हुए स्थगन की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा मामला अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही, कोर्ट ने इस कानून के तहत की गई नई नियुक्तियों पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया।

चुनाव आयोग और संवैधानिक स्थिति

भारत का चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित एक संवैधानिक संस्था है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस मामले का निर्णय भविष्य में चुनाव आयोग की संरचना और कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • चुनाव आयोग भारत का एक संवैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना अनुच्छेद 324 के तहत हुई है।
  • 2023 का अधिनियम मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित है।
  • चयन समिति में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और लोकसभा के विपक्ष के नेता शामिल हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने पहले मुख्य न्यायाधीश को समिति में शामिल किया था।
  • इस मामले की सुनवाई दो-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा की जा रही है।

यह मामला भारतीय लोकतंत्र में संस्थागत संतुलन और स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया किस प्रकार संचालित होगी और इसमें न्यायपालिका की भूमिका कितनी होनी चाहिए।

Originally written on May 6, 2026 and last modified on May 6, 2026.

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