सिक्किम पूर्ण साक्षर राज्य
सिक्किम ने शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 27 मई 2026 को राज्य को उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया। सिक्किम की साक्षरता दर 99.82 प्रतिशत दर्ज की गई, जो शिक्षा मंत्रालय के 95 प्रतिशत मानक से काफी अधिक है।
उल्लास कार्यक्रम की भूमिका
उल्लास का पूरा नाम “समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने की समझ” है। यह राष्ट्रीय वयस्क शिक्षा कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य पढ़ने, लिखने और बुनियादी गणना कौशल से वंचित वयस्कों को साक्षर बनाना है। सिक्किम में यह कार्यक्रम 14 नवंबर 2022 को शुरू हुआ था और इसे सभी छह जिलों, 34 ब्लॉकों, ग्राम पंचायत इकाइयों और वार्डों तक पहुंचाया गया।
घोषणा और उपलब्धि
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने गंगटोक के मनन केंद्र में सिक्किम विश्वविद्यालय के 7वें दीक्षांत समारोह के दौरान यह घोषणा की। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर भी उपस्थित रहे। राज्य में सर्वेक्षण के दौरान 15,361 निरक्षर वयस्कों की पहचान की गई, जिनमें से 14,447 को बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा के माध्यम से साक्षर प्रमाणित किया गया।
स्वयंसेवकों का योगदान
इस अभियान में 4,000 से अधिक स्वयंसेवी शिक्षकों ने भाग लिया। इनमें स्कूल शिक्षक, कॉलेज विद्यार्थी और अन्य शिक्षित नागरिक शामिल थे। विशेष बात यह रही कि इन स्वयंसेवकों ने बिना मानदेय के कार्य किया, जिससे यह अभियान जनभागीदारी का मजबूत उदाहरण बन गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” उल्लास कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय का राष्ट्रीय वयस्क शिक्षा कार्यक्रम है। ” पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने के लिए 95 प्रतिशत साक्षरता मानक तय है। ” सिक्किम में छह जिले और 34 ब्लॉक हैं। ” शिक्षार्थियों को प्रमाणित करने के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जाती है। सिक्किम की यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, सामुदायिक सहयोग और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बाद सिक्किम का पूर्ण साक्षरता की श्रेणी में शामिल होना भारत के साक्षरता अभियान को नई दिशा देता है।