साइबर धोखाधड़ी पर त्वरित कार्रवाई के लिए राज्यों में लागू होगा ई-जीरो एफआईआर सिस्टम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 जून 2026 को आयोजित प्रगति (PRAGATI) की 52वीं बैठक में सभी राज्यों को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में एकीकृत डिजिटल ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। यह व्यवस्था गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से जुड़ी है और विशेष रूप से बड़ी वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित की गई है।
ई-जीरो एफआईआर सिस्टम क्या है?
ई-जीरो एफआईआर एक डिजिटल प्रणाली है, जो सत्यापित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों को स्वतः जीरो एफआईआर (Zero FIR) में परिवर्तित करती है। जीरो एफआईआर ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत किसी भी संज्ञेय अपराध की शिकायत देश के किसी भी पुलिस थाने में दर्ज की जा सकती है, चाहे घटना किसी अन्य क्षेत्राधिकार में हुई हो। बाद में जांच के लिए मामला संबंधित पुलिस थाने को स्थानांतरित कर दिया जाता है। ई-जीरो एफआईआर प्रणाली विशेष रूप से 10 लाख रुपये से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों के लिए बनाई गई है। यह शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) या हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से दर्ज की जाती हैं। इसका उद्देश्य एफआईआर दर्ज करने में देरी कम करना और तुरंत जांच शुरू करना है।
साइबर अपराध रिपोर्टिंग व्यवस्था
भारत में साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cybercrime Reporting Portal) एक केंद्रीय ऑनलाइन मंच है। वहीं 1930 हेल्पलाइन का उपयोग साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल सूचना देने तथा धन की हानि को कम करने के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु किया जाता है। इन दोनों माध्यमों से प्राप्त शिकायतों का समन्वय भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (Indian Cybercrime Coordination Centre – I4C) करता है। गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत यह संस्था साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण का कार्य करती है।
राज्यों में विस्तार और वर्तमान स्थिति
अब तक केवल नौ राज्यों ने ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को पूरी तरह लागू किया है। असम ने 23 जून 2026 को इस पहल को शुरू किया, जबकि दिल्ली में मई 2025 से इसका पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था, जिसका उद्देश्य साइबर शिकायतों को तेजी से एफआईआर में बदलना था। प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) के साथ समन्वय स्थापित कर इस प्रणाली को पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू करें।
‘गोल्डन आवर’ में कार्रवाई का महत्व
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हें ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है, क्योंकि इसी अवधि में बैंक खातों को फ्रीज़ कर धन की रिकवरी की संभावना सबसे अधिक होती है। ई-जीरो एफआईआर प्रणाली का उद्देश्य शिकायत दर्ज होते ही पुलिस, बैंक और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन मामलों में उपयोगी है, जिनमें डिजिटल साक्ष्य और धन का लेन-देन कई राज्यों या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक फैला होता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PRAGATI का पूर्ण नाम प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (Pro-Active Governance and Timely Implementation) है।
- जीरो एफआईआर की व्यवस्था किसी भी पुलिस थाने में क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना संज्ञेय अपराध दर्ज करने की अनुमति देती है।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) भारत में साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करने का आधिकारिक ऑनलाइन मंच है।
- 1930 भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर है।
ई-जीरो एफआईआर प्रणाली भारत की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को अधिक तेज, समन्वित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके व्यापक क्रियान्वयन से साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित एफआईआर, शीघ्र जांच और शुरुआती घंटों में धन की रिकवरी की संभावना बढ़ेगी, जिससे डिजिटल लेनदेन करने वाले नागरिकों का विश्वास और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगे।