भारत सरकार ने जारी किया सीएएफई-III (CAFE-III) मानकों का मसौदा
भारत सरकार ने 16 जुलाई 2026 को कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE-III) मानकों का मसौदा जारी किया है। यह मसौदा भारत में बिक्री के लिए वर्ष 2027-28 से 2031-32 के दौरान निर्मित या आयातित एम1 (M1) श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू होगा। प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य वाहनों की औसत ईंधन दक्षता बढ़ाना, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है। यह मसौदा मौजूदा CAFE-II मानकों के बाद अगला चरण होगा।
सीएएफई (CAFE) क्या है?
कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (Corporate Average Fuel Economy) एक नियामक व्यवस्था है, जिसके माध्यम से किसी वाहन निर्माता द्वारा बेचे गए वाहनों की औसत ईंधन दक्षता का आकलन किया जाता है। भारत में यह व्यवस्था एम1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू होती है। इस श्रेणी में ऐसे वाहन शामिल हैं जिनमें चालक की सीट के अतिरिक्त अधिकतम आठ यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होती है। भारत में सीएएफई मानकों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है। प्रस्तावित मसौदे के अनुसार CAFE-III 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा, जबकि CAFE-II का कार्यकाल 31 मार्च 2027 को समाप्त हो जाएगा।
प्रस्तावित ईंधन दक्षता लक्ष्य
मसौदे में अनुपालन अवधि के दौरान ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन के लिए क्रमिक रूप से अधिक कठोर लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। वित्त वर्ष 2027-28 के लिए लक्ष्य प्रति 100 किलोमीटर 3.996 लीटर ईंधन खपत अथवा 94.76 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है। वहीं 2031-32 तक इसे घटाकर प्रति 100 किलोमीटर 3.3273 लीटर तथा 78.90 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर करने का प्रस्ताव है। ये लक्ष्य भारत में बेचे जाने वाले यात्री वाहनों के घोषित टेलपाइप कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन पर आधारित होंगे। अनुपालन का प्रमुख मानदंड वाहनों के CO₂ उत्सर्जन को बनाया गया है।
अनुपालन व्यवस्था और तकनीकी प्रोत्साहन
मसौदे में वाहन निर्माताओं के लिए बाजार-आधारित अनुपालन प्रणाली का प्रस्ताव रखा गया है। यदि कोई निर्माता निर्धारित लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाता है, तो वह फ्यूल-इफिशिएंसी क्रेडिट का व्यापार कर सकता है या ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) से क्रेडिट खरीद सकता है। इसके अलावा, स्वीकृत ईंधन-बचत तकनीकों को अपनाने वाले निर्माताओं को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। प्रत्येक तकनीक के लिए अधिकतम 1 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर तक का लाभ मिलेगा तथा कुल लाभ 9 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर से अधिक नहीं होगा। मसौदे के अनुसार, BEE क्रेडिट बायआउट मूल्य वित्त वर्ष 2027-28 में ₹2,500 प्रति ग्राम CO₂/किमी से शुरू होगा और प्रत्येक वर्ष बढ़ते हुए 2031-32 तक ₹4,500 प्रति ग्राम CO₂/किमी हो जाएगा।
सार्वजनिक परामर्श और आगे की प्रक्रिया
विद्युत मंत्रालय ने मसौदा CAFE-III मानकों पर सभी हितधारकों से 6 अगस्त 2026 तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। यह सार्वजनिक परामर्श प्रस्तावित नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) भारत में ऊर्जा दक्षता से जुड़े उपायों के लिए स्थापित वैधानिक संस्था है।
- एम1 (M1) श्रेणी में ऐसे यात्री वाहन आते हैं जिनमें चालक के अतिरिक्त अधिकतम आठ सीटें होती हैं।
- CAFE मानक वाहनों की औसत ईंधन खपत और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के आधार पर अनुपालन तय करते हैं।
- मसौदे में एथेनॉल, जैव ईंधन (Bio-fuel) और संपीड़ित जैव गैस (Compressed Bio-Gas) को कार्बन-न्यूट्रैलिटी समायोजन के लिए मान्यता दी गई है।
प्रस्तावित CAFE-III मानक भारत के परिवहन क्षेत्र को अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन नियमों के लागू होने से वाहन निर्माता स्वच्छ तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे ईंधन की खपत कम होगी, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।