केरल के पश्चिमी घाट में डैमसेलफ्लाई की नई प्रजातियों की खोज

केरल के पश्चिमी घाट में डैमसेलफ्लाई की नई प्रजातियों की खोज

केरल के पश्चिमी घाट में वर्ष 2023 से 2026 के बीच डैमसेलफ्लाई (Damselfly) की कई नई प्रजातियों की खोज ने भारत की जैव विविधता को नई पहचान दी है। इन खोजों में लेस्टेस पलोटी (Lestes paloti), युफेआ वायनाडेन्सिस (Euphaea wayanadensis), मेलानोन्यूरा अगस्थ्यमलाइका (Melanoneura agasthyamalaica), प्रोटोस्टिक्टा आर्मागेड्डोनिया (Protosticta armageddonia) और प्रोटोस्टिक्टा सैंगुइनिथोरैक्स (Protosticta sanguinithorax) जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल हैं। ये खोजें पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक महत्व और संरक्षण की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित करती हैं।

ओडोनाटा और डैमसेलफ्लाई का वर्गीकरण

डैमसेलफ्लाई ओडोनाटा (Odonata) गण का हिस्सा हैं, जिसमें ड्रैगनफ्लाई और डैमसेलफ्लाई दोनों शामिल होते हैं। डैमसेलफ्लाई सामान्यतः पतले शरीर, संकरी बनावट और नाजुक पंखों वाली कीट होती हैं। इनका निवास मुख्य रूप से स्वच्छ जलधाराओं, आर्द्रभूमियों और घने वनों के आसपास होता है। पश्चिमी घाट का नम और वनाच्छादित वातावरण इनके लिए आदर्श आवास प्रदान करता है।

पश्चिमी घाट: जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र

पश्चिमी घाट भारत के सबसे समृद्ध जैव विविधता क्षेत्रों में से एक है और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। केरल के संरक्षित वन क्षेत्र, विशेषकर साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान और पेप्पारा वन्यजीव अभयारण्य, दुर्लभ कीटों एवं अन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां लगातार नई प्रजातियों का मिलना इस क्षेत्र की पारिस्थितिक समृद्धि को दर्शाता है।

हाल के वर्षों में दर्ज नई प्रजातियां

जुलाई 2026 में लेस्टेस पलोटी (Lestes paloti) की खोज केरल के पश्चिमी घाट में की गई, जिसका विवरण इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओडोनाटोलॉजी में प्रकाशित हुआ। यह खोज क्षेत्र में ओडोनाटा अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई। अक्टूबर 2025 में साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान में छह नई ओडोनाटा प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया। इनमें ब्लू-नेक्ड रीडटेल (Protosticta mortoni), वायनाड टॉरेंट डार्ट (Euphaea wayanadensis) और ब्लैक एंड येलो बैम्बूटेल (Elattoneura tetrica) प्रमुख थीं। अप्रैल 2025 में युफेआ वायनाडेन्सिस का औपचारिक वर्णन वायनाड क्षेत्र से किया गया। उस समय केरल में ओडोनाटा प्रजातियों की कुल संख्या 191 दर्ज की गई थी। नवंबर 2024 में मेलानोन्यूरा अगस्थ्यमलाइका, जिसे अगस्थ्यमलाई बैम्बूटेल भी कहा जाता है, तिरुवनंतपुरम जिले के पेप्पारा वन्यजीव अभयारण्य के निकट खोजी गई। सितंबर 2023 में प्रोटोस्टिक्टा आर्मागेड्डोनिया, जिसे आर्मागेड्डोन रीडटेल के नाम से जाना जाता है, दक्षिणी पश्चिमी घाट में तिरुवनंतपुरम के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से दर्ज की गई।

पहचान और वर्गीकरण की आधुनिक तकनीकें

नई डैमसेलफ्लाई प्रजातियों की पहचान केवल बाहरी बनावट के आधार पर नहीं की जाती। वैज्ञानिक आकृतिक अध्ययन (Morphology), उच्च-रिज़ॉल्यूशन माइक्रोस्कोपी और आणविक विश्लेषण (Molecular Analysis) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हैं। इनकी सहायता से एक-दूसरे से मिलती-जुलती प्रजातियों के बीच सूक्ष्म अंतर स्पष्ट किए जाते हैं। इसी प्रकार के विश्लेषण से शैडोडैमसेल समूह को रेड-स्पॉट शैडोडैमसेल से अलग पहचाना गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ओडोनाटा (Odonata) गण में ड्रैगनफ्लाई और डैमसेलफ्लाई दोनों शामिल होते हैं।
  • पश्चिमी घाट भारत के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में से एक है और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है।
  • साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान केरल के पलक्कड़ जिले में स्थित है।
  • Euphaea wayanadensis का लोकप्रिय नाम वायनाड टॉरेंट डार्ट है।

केरल के पश्चिमी घाट में लगातार नई डैमसेलफ्लाई प्रजातियों की खोज यह दर्शाती है कि भारत के प्राकृतिक वन क्षेत्र अभी भी वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन खोजों से न केवल जैव विविधता की समझ बढ़ती है, बल्कि दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के प्रयासों को भी नई दिशा मिलती है।

Originally written on July 16, 2026 and last modified on July 16, 2026.

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