कांगो में बंदर की नई प्रजाति ‘कोलोबस कांगोएन्सिस’ की खोज

कांगो में बंदर की नई प्रजाति ‘कोलोबस कांगोएन्सिस’ की खोज

अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) में वैज्ञानिकों ने बंदर की एक नई प्रजाति कोलोबस कांगोएन्सिस (Colobus congoensis) की पहचान की है। स्थानीय भाषा में इसे ‘लिक्वेली’ (Likweli) कहा जाता है। यह प्रजाति कोलोबस बंदरों के समूह से संबंधित है, जो अफ्रीका में पाए जाने वाले ओल्ड वर्ल्ड मंकी (Old World Monkeys) का हिस्सा हैं। इस महत्वपूर्ण खोज का विवरण 15 जुलाई 2026 को प्रतिष्ठित शोध पत्रिका PLOS One में प्रकाशित किया गया। यह खोज अफ्रीकी वन्यजीवों की जैव विविधता और संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

वर्गीकरण और पहचान

वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक (Genetic), शारीरिक संरचना (Anatomical) और ध्वनि विश्लेषण (Acoustic Analysis) के आधार पर कोलोबस कांगोएन्सिस को एक अलग प्रजाति के रूप में प्रमाणित किया। इसका सबसे निकट संबंधी कोलोबस सैटानास (Colobus satanas) है, लेकिन दोनों प्रजातियों के बीच लगभग 1,200 किलोमीटर की भौगोलिक दूरी है। शोध के अनुसार इन दोनों का विकासवादी विभाजन लगभग 40 से 50 लाख वर्ष पहले हुआ था।

प्रजाति की प्रमुख शारीरिक विशेषताएँ

लिक्वेली बंदर का शरीर मुख्यतः काले रंग का होता है। इसके होंठ गुलाबी-नारंगी रंग के होते हैं तथा मुंह और नाक के आसपास हल्के नारंगी या क्रीम रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। इसके गालों की हड्डियां धूसर रंग की और बिना बालों वाली होती हैं, जबकि गुदा के आसपास सफेद फर का स्पष्ट पैच पाया जाता है। इन बाहरी विशेषताओं के साथ-साथ आवाज और डीएनए विश्लेषण ने इसे मध्य अफ्रीका की अन्य कोलोबस प्रजातियों से अलग पहचान दिलाई।

आवास और भौगोलिक वितरण

यह नई प्रजाति अत्यंत सीमित क्षेत्र में पाई जाती है। इसका अनुमानित वितरण क्षेत्र लगभग 1,700 वर्ग किलोमीटर है। इसका निवास कांगो बेसिन में लोमामी (Lomami) और लिलो (Lilo) नदियों के बीच स्थित है, जिसका अधिकांश भाग लोमामी राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आता है। इस बंदर की पहली धुंधली तस्वीर वर्ष 2008 में लोमामी नदी के किनारे एक अभियान के दौरान ली गई थी। वर्ष 2018 में स्पष्ट रूप से देखे जाने के बाद वैज्ञानिकों ने इस पर विस्तृत अध्ययन शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप इसे नई प्रजाति के रूप में मान्यता मिली।

संरक्षण की स्थिति और वैज्ञानिक महत्व

शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में इस प्रजाति को संकटग्रस्त (Endangered) श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की है। इसका कारण इसका सीमित भौगोलिक क्षेत्र, कम आबादी, प्राकृतिक आवास का लगातार नष्ट होना और शिकार का बढ़ता खतरा है। पिछले 75 वर्षों में खोजी गई यह केवल पांचवीं नई अफ्रीकी बंदर प्रजाति है। इस शोध में फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी, लुकुरु वाइल्डलाइफ रिसर्च फाउंडेशन, येल यूनिवर्सिटी, सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क, लोमामी नेशनल पार्क तथा फ्रैंकफर्ट जूलॉजिकल सोसाइटी सहित कई संस्थानों के वैज्ञानिकों ने योगदान दिया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कांगो बेसिन अमेज़न के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्र है।
  • ओल्ड वर्ल्ड मंकी सर्कोपिथेसिडी (Cercopithecidae) परिवार से संबंधित होते हैं और मुख्य रूप से अफ्रीका एवं एशिया में पाए जाते हैं।
  • IUCN रेड लिस्ट विश्वभर की प्रजातियों की संरक्षण स्थिति का आकलन करने वाली सबसे प्रमुख वैश्विक सूची है।
  • लोमामी राष्ट्रीय उद्यान वर्ष 2012 में खोजी गई लेसुला बंदर (Cercopithecus lomamiensis) प्रजाति के लिए भी प्रसिद्ध है।

कोलोबस कांगोएन्सिस की खोज यह दर्शाती है कि पृथ्वी के दूरस्थ और संरक्षित वन क्षेत्रों में अब भी अनेक ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं जिनकी वैज्ञानिक पहचान होना बाकी है। यह खोज जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव अनुसंधान और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के महत्व को और अधिक मजबूत करती है।

Originally written on July 16, 2026 and last modified on July 16, 2026.

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