सऊदी अरब का बिना बिजली वाला कूलिंग सिस्टम

सऊदी अरब का बिना बिजली वाला कूलिंग सिस्टम

सऊदी अरब के किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने बिना बिजली के काम करने वाला एक नया कूलिंग सिस्टम विकसित किया है। इस प्रणाली का नाम “नेस्कोड” रखा गया है, जिसका पूरा नाम “नो इलेक्ट्रिसिटी एंड सस्टेनेबल कूलिंग ऑन डिमांड” है। यह तकनीक रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से ठंडक उत्पन्न करती है और इसमें कंप्रेसर या लगातार बिजली की आवश्यकता नहीं होती।

नेस्कोड प्रणाली कैसे काम करती है

नेस्कोड प्रणाली एंडोथर्मिक डिसोल्यूशन के सिद्धांत पर आधारित है। इस प्रक्रिया में कोई पदार्थ पानी में घुलते समय आसपास की ऊष्मा को अवशोषित करता है। इस सिस्टम में अमोनियम नाइट्रेट को पानी में घोला जाता है, जिससे तापमान तेजी से कम हो जाता है। सिस्टम में सौर ऊर्जा का उपयोग करके पानी को वाष्पित किया जाता है और नमक को दोबारा उपयोग योग्य बनाया जाता है। इससे यह प्रणाली बार-बार ठंडक पैदा कर सकती है और ऊर्जा की खपत भी नहीं होती।

अमोनियम नाइट्रेट की भूमिका

अमोनियम नाइट्रेट एक अकार्बनिक लवण है जिसका रासायनिक सूत्र NH4NO3 होता है। इसका उपयोग सामान्य रूप से उर्वरकों और शीतलन प्रक्रियाओं में किया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार अमोनियम नाइट्रेट सस्ता, आसानी से उपलब्ध और सुरक्षित भंडारण योग्य पदार्थ है। यही कारण है कि इसे गर्म और शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त कूलिंग तकनीक माना जा रहा है।

परीक्षण और प्रदर्शन

परीक्षण के दौरान इस प्रणाली ने लगभग 25 डिग्री सेल्सियस तापमान को घटाकर करीब 3.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया। यह प्रक्रिया लगभग 20 मिनट में पूरी हुई। शोधकर्ताओं के अनुसार यह प्रणाली अमोनियम क्लोराइड जैसे अन्य लवणों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक प्रभावी साबित हुई। इसकी कार्यक्षमता और कम लागत इसे भविष्य के टिकाऊ कूलिंग विकल्प के रूप में महत्वपूर्ण बनाती है।

KAUST के अन्य कूलिंग शोध

KAUST के वैज्ञानिकों ने पहले भी बिना बिजली वाले कई कूलिंग समाधान विकसित किए हैं। प्रोफेसर कियाओकियांग गान के नेतृत्व में एक ऐसी तकनीक तैयार की गई थी जो सौर पैनलों को ठंडा रखने के साथ वातावरण से पानी भी एकत्र करती है। इसके अलावा एक अन्य टीम ने सोडियम पॉलीएक्रिलेट और लिथियम क्लोराइड से बना कम लागत वाला निष्क्रिय कूलिंग पदार्थ विकसित किया, जो रात में हवा की नमी को अवशोषित कर दिन में ठंडक प्रदान करता है।

उपयोग और महत्व

यह तकनीक विशेष रूप से गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों, अस्थिर बिजली आपूर्ति वाले ग्रामीण इलाकों और कम आय वाले परिवारों के लिए उपयोगी मानी जा रही है। इससे पारंपरिक एयर कंडीशनर पर निर्भरता कम हो सकती है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आने की संभावना है। भविष्य में इस तरह की तकनीकें ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • KAUST का पूरा नाम किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी है।
  • एंडोथर्मिक डिसोल्यूशन में पदार्थ घुलते समय ऊष्मा को अवशोषित करता है।
  • अमोनियम नाइट्रेट का रासायनिक सूत्र NH4NO3 है।
  • निष्क्रिय कूलिंग प्रणाली बिना मोटर, कंप्रेसर और लगातार बिजली के काम कर सकती है।

सऊदी अरब का नेस्कोड कूलिंग सिस्टम ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह नवाचार भविष्य में टिकाऊ और सस्ती कूलिंग व्यवस्था के नए विकल्प प्रदान कर सकता है।

Originally written on May 12, 2026 and last modified on May 12, 2026.

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