संयुक्त राष्ट्र ने मेजर अभिलाषा बराक को सैन्य जेंडर एडवोकेट पुरस्कार से सम्मानित किया

संयुक्त राष्ट्र ने मेजर अभिलाषा बराक को सैन्य जेंडर एडवोकेट पुरस्कार से सम्मानित किया

भारतीय सेना की अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 के लिए संयुक्त राष्ट्र सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान 22-23 मई 2026 को घोषित किया गया। मेजर बराक वर्तमान में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत भारतीय बटालियन की फीमेल एंगेजमेंट टीम की कमांडर के रूप में कार्यरत हैं। यह पुरस्कार शांति अभियानों में लैंगिक समानता और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने वाले सैन्य अधिकारियों को दिया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र सैन्य जेंडर एडवोकेट पुरस्कार

संयुक्त राष्ट्र सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2016 में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान विभाग के सैन्य मामलों के कार्यालय द्वारा की गई थी। यह पुरस्कार हर वर्ष ऐसे सैन्य शांति रक्षक को दिया जाता है जिसने महिलाओं की सुरक्षा, लैंगिक समानता और शांति अभियानों में महिला भागीदारी को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। यह सम्मान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडा के तहत दिए जाने वाले महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक माना जाता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1325

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1325 वर्ष 2000 में अपनाया गया था। यह प्रस्ताव महिलाओं, शांति और सुरक्षा से संबंधित है। इसमें संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा शांति अभियानों में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल करने पर जोर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में महिला अधिकारियों की भागीदारी को इस प्रस्ताव के कार्यान्वयन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

लेबनान में मेजर अभिलाषा बराक की भूमिका

लेबनान में तैनाती के दौरान मेजर अभिलाषा बराक ने महिलाओं और किशोरियों के लिए सामुदायिक संपर्क और जागरूकता कार्यक्रमों का नेतृत्व किया। उन्होंने स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित कर महिलाओं की समस्याओं और जरूरतों को समझने का प्रयास किया। इसके अलावा उन्होंने मिशन क्षेत्र में तैनात अन्य शांति सैनिकों के लिए जेंडर सेंसिटाइजेशन प्रशिक्षण भी आयोजित किया। इन प्रयासों का उद्देश्य शांति अभियानों में संवेदनशील और समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था।

भारतीय सेना में मेजर अभिलाषा बराक की उपलब्धियां

मेजर अभिलाषा बराक मई 2022 में भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट बनी थीं। यह उपलब्धि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी गई थी। वे संयुक्त राष्ट्र सैन्य जेंडर एडवोकेट पुरस्कार पाने वाली तीसरी भारतीय शांति सैनिक हैं। इससे पहले मेजर सुमन गावानी को वर्ष 2019 और मेजर राधिका सेन को वर्ष 2023 में यह सम्मान मिल चुका है।

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत की भूमिका

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सक्रिय योगदान देता रहा है। भारतीय सेना के हजारों सैनिक विभिन्न देशों में शांति स्थापना मिशनों में भाग ले चुके हैं। भारतीय महिला सैनिकों की भागीदारी ने इन अभियानों में सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण को मजबूत किया है। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इस पुरस्कार का औपचारिक समारोह 29 मई 2026 के आसपास आयोजित होने की संभावना है। यह दिन अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1325 वर्ष 2000 में अपनाया गया था।
  • मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक दिवस हर वर्ष 29 मई को मनाया जाता है।
  • भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे बड़े योगदान देने वाले देशों में शामिल है।

मेजर अभिलाषा बराक को मिला यह सम्मान न केवल भारतीय सेना बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय महिला सैनिकों की क्षमता और नेतृत्व को भी प्रदर्शित करती है।

Originally written on May 23, 2026 and last modified on May 23, 2026.

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