भारत में खाद्य तेल आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए चलाया जा रहा NMEO-OP मिशन

भारत में खाद्य तेल आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए चलाया जा रहा NMEO-OP मिशन

भारत सरकार ने वर्ष 2021 में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–ऑयल पाम (NMEO-OP) की शुरुआत की थी। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसकी कुल लागत 11,040 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इस मिशन का उद्देश्य देश में ऑयल पाम की खेती बढ़ाना, कच्चे पाम तेल (CPO) का उत्पादन बढ़ाना और खाद्य तेलों में आयात पर निर्भरता कम करना है। भारत वर्तमान में अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए यह मिशन आर्थिक और कृषि दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

NMEO-OP मिशन के लक्ष्य

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–ऑयल पाम का लक्ष्य वर्ष 2025-26 तक 6.5 लाख हेक्टेयर भूमि को ऑयल पाम खेती के अंतर्गत लाना है। दीर्घकालिक लक्ष्य 10 लाख हेक्टेयर तक विस्तार करना है। नवंबर 2025 तक लगभग 6.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को इस खेती के अंतर्गत शामिल किया जा चुका था। कच्चे पाम तेल का उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2014-15 में जहां उत्पादन 1.91 लाख टन था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 3.80 लाख टन हो गया। सरकार का लक्ष्य 2025-26 तक 11.20 लाख टन और 2029-30 तक 28 लाख टन उत्पादन हासिल करना है।

भारत की खाद्य तेल आयात निर्भरता

भारत अपनी कुल खाद्य तेल आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। देश में कुल खाद्य तेल खपत में पाम ऑयल की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत से अधिक है। वहीं कुल खाद्य तेल आयात में इसका योगदान लगभग 59 प्रतिशत है। भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम ऑयल आयात करता है। नीति आयोग की अगस्त 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत चावल की भूसी के तेल, अरंडी, कुसुम, तिल और नाइजर बीज उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर है। इसके बावजूद घरेलू उत्पादन देश की केवल 44 प्रतिशत खाद्य तेल आवश्यकता को ही पूरा कर पाता है।

ऑयल पाम खेती की विशेषताएं और चुनौतियां

ऑयल पाम एक उष्णकटिबंधीय बहुवर्षीय फसल है, जिससे पाम ऑयल और पाम कर्नेल ऑयल प्राप्त किया जाता है। इस फसल में उत्पादन शुरू होने में लगभग 4 से 5 वर्ष का समय लगता है। इसके अलावा इसमें पानी और पोषक तत्वों की अधिक आवश्यकता होती है। ऑयल पाम के ताजे फलों के गुच्छों को कटाई के 24 से 48 घंटे के भीतर प्रसंस्करण करना जरूरी होता है। यदि ऐसा नहीं किया जाए तो तेल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। आंध्र प्रदेश भारत में लगभग 80 प्रतिशत कच्चे पाम तेल उत्पादन के लिए जिम्मेदार है। वर्ष 2010 से 2023 के बीच राज्य में ऑयल पाम खेती में लगभग 122 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, यह फसल सीमांत धान खेती की तुलना में दोगुने से अधिक पानी की मांग करती है। विशेषज्ञों ने मिट्टी की उर्वरता में कमी, छोटे किसानों के लिए भूमि उपलब्धता में गिरावट और कृषि रसायनों के बढ़ते उपयोग को इसकी प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया है।

मूल्य निर्धारण और वैश्विक आपूर्ति

सरकार ऑयल पाम किसानों के लिए दोहरी मूल्य प्रणाली लागू करती है। इसमें मासिक फॉर्मूला मूल्य और वार्षिक स्थिर व्यवहार्यता मूल्य शामिल हैं। इसका उद्देश्य किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करना है। इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे बड़े निर्यातक देश अब अपने पाम ऑयल उत्पादन का बड़ा हिस्सा बायोडीजल मिश्रण कार्यक्रमों में उपयोग कर रहे हैं। इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और भारत की आयात निर्भरता पर दबाव बढ़ सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • NMEO-OP की शुरुआत वर्ष 2021 में की गई थी।
  • ऑयल पाम एक बहुवर्षीय उष्णकटिबंधीय फसल है।
  • भारत अपनी खाद्य तेल आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है।
  • ताजे ऑयल पाम फलों को 24-48 घंटे के भीतर प्रसंस्करण करना जरूरी होता है।

भारत सरकार का NMEO-OP मिशन खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि पर्यावरणीय और कृषि संबंधी चुनौतियों को संतुलित रखते हुए इस मिशन को आगे बढ़ाना भविष्य में बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

Originally written on May 23, 2026 and last modified on May 23, 2026.

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