चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अध्ययन करेगा चीन का चांग’ई-7 मिशन
चीन वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में अपने महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन चांग’ई-7 को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का अध्ययन करेगा और वहां मौजूद जल बर्फ तथा अन्य संसाधनों की खोज पर केंद्रित रहेगा। मिशन का मुख्य उद्देश्य स्थायी रूप से अंधेरे में रहने वाले क्षेत्रों का सर्वेक्षण करना और भविष्य में चंद्र अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की संभावनाओं का आकलन करना है।
चांग’ई-7 मिशन की विशेषताएं
चांग’ई-7 मिशन में एक ऑर्बिटर, लैंडर, रोवर और एक छोटा हॉपिंग अंतरिक्ष यान शामिल होगा। यह मिशन अत्यधिक सटीक लैंडिंग तकनीक से लैस होगा, जिसकी सटीकता 100 मीटर से भी कम बताई गई है। मिशन के लिए शैकलटन क्रेटर के किनारे को संभावित लैंडिंग स्थल के रूप में चुना गया है। शैकलटन क्रेटर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट स्थित एक प्रसिद्ध प्रभाव क्रेटर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके स्थायी छायादार क्षेत्रों में जल बर्फ और अन्य वाष्पशील पदार्थ सुरक्षित हो सकते हैं।
जल बर्फ और संसाधनों की खोज
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां सूर्य का प्रकाश कभी नहीं पहुंचता। इन्हें स्थायी छायादार क्षेत्र कहा जाता है। इन स्थानों पर अत्यधिक कम तापमान के कारण जल बर्फ लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है। चांग’ई-7 मिशन इन क्षेत्रों में जल बर्फ और अन्य वाष्पशील तत्वों की खोज करेगा। यह जानकारी भविष्य में मानव मिशनों और चंद्रमा पर स्थायी अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ वैज्ञानिक उपकरण
इस मिशन में कुल 18 वैज्ञानिक पेलोड लगाए जाएंगे। इनमें मिस्र अंतरिक्ष एजेंसी और बहरीन राष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान एजेंसी जैसे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों द्वारा विकसित उपकरण भी शामिल हैं। इससे यह मिशन वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। वैज्ञानिक उपकरण चंद्र सतह की संरचना, तापमान, खनिज और संसाधनों का अध्ययन करेंगे। इससे चंद्रमा के भूगर्भीय इतिहास और संसाधन क्षमता को समझने में मदद मिलेगी।
चांग’ई-8 मिशन की भी तैयारी
चीन वर्ष 2028 या 2029 में चांग’ई-8 मिशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। यह मिशन दक्षिणी ध्रुव पर आगे की जांच करेगा और इन-सिटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन तकनीक का परीक्षण करेगा। इसके तहत चंद्र मिट्टी का उपयोग कर 3D प्रिंटिंग जैसी तकनीकों को आजमाया जाएगा। चांग’ई-8 मिशन में 11 देशों और क्षेत्रों के पेलोड शामिल होंगे। पाकिस्तान का चंद्र रोवर और तुर्किये के अन्वेषण रोवर भी इस मिशन का हिस्सा होंगे। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर मानव उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
चीन का दीर्घकालिक चंद्र कार्यक्रम
चीन वर्ष 2031 से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा 2030 तक मानवयुक्त चंद्र मिशन भेजने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। यह कार्यक्रम चीन की अंतरिक्ष क्षमता को मजबूत करने और भविष्य के अंतरिक्ष अनुसंधान में नेतृत्व स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी छायादार क्षेत्रों में जल बर्फ मिलने की संभावना है।
- शैकलटन क्रेटर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित प्रसिद्ध प्रभाव क्रेटर है।
- इन-सिटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन का अर्थ स्थानीय संसाधनों का अंतरिक्ष में उपयोग करना है।
- इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन चीन की प्रस्तावित चंद्र अनुसंधान परियोजना है।
चांग’ई-7 मिशन को चंद्र अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह मिशन न केवल चंद्रमा पर संसाधनों की खोज करेगा बल्कि भविष्य के मानव मिशनों और स्थायी चंद्र आधार की दिशा में भी नई संभावनाएं खोल सकता है।