संयुक्त राष्ट्र के पहले वैश्विक एआई गवर्नेंस संवाद में भारत की भागीदारी
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग और उससे जुड़े वैश्विक अवसरों एवं चुनौतियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने एआई गवर्नेंस पर अपने पहले सार्वभौमिक वैश्विक संवाद का आयोजन किया है। यह 6-7 जुलाई 2026 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत भी सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह कर रहे हैं। यह मंच संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंतर्गत एआई गवर्नेंस पर पहला सार्वभौमिक और बहु-हितधारक (मल्टी-स्टेकहोल्डर) संवाद माना जा रहा है।
एआई गवर्नेंस के लिए संयुक्त राष्ट्र की नई पहल
संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 79/325 के तहत संयुक्त राष्ट्र वैश्विक एआई गवर्नेंस संवाद की स्थापना की गई है। यह पहल सितंबर 2024 में अपनाए गए ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट के आधार पर विकसित की गई है। इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और उपयोग से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, निजी क्षेत्र, वैज्ञानिक समुदाय और नागरिक समाज के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। यह संवाद राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय स्तर पर चल रहे एआई गवर्नेंस प्रयासों के साथ समन्वय स्थापित करने का भी माध्यम बनेगा।
जिनेवा बैठक के प्रमुख विषय
जिनेवा में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े चार प्रमुख विषयों पर चर्चा की जा रही है। इनमें एआई के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव, वैश्विक एआई असमानता को कम करना, सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई को बढ़ावा देना तथा एआई के उपयोग के दौरान मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। इन विषयों पर वैश्विक सहमति बनाने और भविष्य की नीतियों की दिशा तय करने का प्रयास किया जाएगा।
वैज्ञानिक मूल्यांकन और भविष्य की योजना
इस सम्मेलन में इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल साइंटिफिक पैनल ऑन एआई (IISPA) की पहली वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जा रही है। यह स्वतंत्र वैज्ञानिक पैनल कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमताओं, संभावनाओं और उससे जुड़े जोखिमों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करता है। इस वैश्विक संवाद से पहले फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हितधारकों के साथ एक प्रत्यक्ष परामर्श बैठक भी आयोजित की गई थी। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र वैश्विक एआई गवर्नेंस संवाद का दूसरा सत्र मई 2027 में न्यूयॉर्क में आयोजित किया जाएगा।
भारत की भूमिका और महत्व
भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तेजी से उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। डिजिटल नवाचार, सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना और जिम्मेदार एआई के विकास को लेकर भारत की नीतियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के इस वैश्विक मंच पर भारत की भागीदारी न केवल उसकी तकनीकी क्षमता को दर्शाती है, बल्कि सुरक्षित, समावेशी और मानव-केंद्रित एआई व्यवस्था के निर्माण में उसकी प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संयुक्त राष्ट्र वैश्विक एआई गवर्नेंस संवाद संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंतर्गत एआई गवर्नेंस पर पहला सार्वभौमिक और बहु-हितधारक मंच है।
- इस संवाद की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 79/325 के तहत की गई है।
- ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट को सितंबर 2024 में अपनाया गया था।
- IISPA का पूर्ण रूप इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल साइंटिफिक पैनल ऑन एआई है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था और समाज पर गहरा प्रभाव डालने वाली तकनीक है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र का यह वैश्विक संवाद जिम्मेदार, सुरक्षित और समावेशी एआई गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत की सक्रिय भागीदारी इस क्षेत्र में उसकी बढ़ती वैश्विक भूमिका और नेतृत्व क्षमता को भी प्रदर्शित करती है।