गुवाहाटी घोषणा के साथ ब्रिक्स देशों ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बढ़ाया सहयोग
भारत ने 6-7 जुलाई 2026 को असम के गुवाहाटी में ब्रिक्स देशों के एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक की मेजबानी की। यह बैठक ऐसे समय आयोजित हुई जब दुनिया भर में सिंथेटिक ड्रग्स, प्रीकर्सर रसायनों के दुरुपयोग, डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी और क्रिप्टोकरेंसी आधारित अवैध लेनदेन जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच समन्वय बढ़ाना, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान मजबूत करना और मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध संयुक्त कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना था। बैठक के समापन पर ब्रिक्स देशों ने गुवाहाटी घोषणा को अपनाकर सहयोग को नई दिशा देने का संकल्प लिया।
ब्रिक्स एंटी-ड्रग सहयोग को मिली नई दिशा
ब्रिक्स एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की यह बैठक सदस्य देशों के बीच मादक पदार्थों के नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर उच्च स्तरीय सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है। भारत ने इस अवसर पर एक समर्पित ब्रिक्स वर्चुअल वर्किंग ग्रुप स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिसका उद्देश्य वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करना, तस्करी के नए पैटर्न का विश्लेषण करना तथा संयुक्त कानून प्रवर्तन अभियानों का बेहतर समन्वय करना है। बैठक में सीमा पार अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी सहयोग और संस्थागत साझेदारी पर भी विशेष बल दिया गया।
गुवाहाटी घोषणा और प्रमुख प्राथमिकताएं
7 जुलाई 2026 को अपनाई गई गुवाहाटी घोषणा में सदस्य देशों के बीच समय पर सूचना और खुफिया जानकारी साझा करने, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान तथा नवाचार आधारित और डेटा-संचालित तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया गया। वर्ष 2026 की बैठक में तीन प्रमुख प्राथमिकताओं को केंद्र में रखा गया। इनमें सिंथेटिक ड्रग्स और प्रीकर्सर रसायनों की अवैध आपूर्ति पर रोक, खुफिया साझेदारी और संयुक्त परिचालन सहयोग को मजबूत करना तथा क्षमता निर्माण और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
भारत का मादक पदार्थ नियंत्रण ढांचा
वर्ष 2026 में भारत ब्रिक्स का अध्यक्ष देश रहा, जिसकी थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” निर्धारित की गई। भारत में मादक पदार्थों से जुड़े कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो प्रमुख समन्वय एजेंसी के रूप में कार्य करता है। 26 जून 2026 को भारत ने “विजन डॉक्यूमेंट ऑन नारकोटिक्स कंट्रोल (2026-2029)” भी जारी किया, जिसमें प्रवर्तन, खुफिया एवं परिचालन, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण, मांग एवं हानि न्यूनीकरण तथा क्षमता निर्माण एवं निगरानी जैसे चार प्रमुख स्तंभ शामिल हैं। इसके अलावा भारत ने 16 दिसंबर 2025 तक 27 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते तथा 19 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे, जिनका उद्देश्य सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध सूचना साझाकरण और कानूनी सहयोग को बढ़ाना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रिक्स का गठन मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुआ था, बाद में इसमें नए सदस्य देशों का विस्तार किया गया।
- भारत में मादक पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थों के नियंत्रण के लिए “नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस अधिनियम, 1985” प्रमुख कानून है।
- प्रीकर्सर ऐसे रसायन होते हैं जिनका उपयोग मादक पदार्थों और मन:प्रभावी दवाओं के निर्माण में किया जाता है।
- डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी आधारित भुगतान प्रणालियां वैश्विक स्तर पर ऑनलाइन मादक पदार्थों की अवैध तस्करी में तेजी से उपयोग की जा रही हैं।
गुवाहाटी में आयोजित यह बैठक दर्शाती है कि मादक पदार्थों की तस्करी जैसी अंतरराष्ट्रीय चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केवल राष्ट्रीय प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि बहुपक्षीय सहयोग भी उतना ही आवश्यक है। गुवाहाटी घोषणा और भारत की नई पहलें भविष्य में ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग और संयुक्त कार्रवाई को मजबूती प्रदान कर सकती हैं।