वैज्ञानिकों ने खोजे पीवीसी माइक्रोप्लास्टिक को विघटित करने वाले बैक्टीरिया
प्लास्टिक प्रदूषण आज विश्व के सामने सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। मिस्र के काहिरा विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के शोधकर्ताओं ने जून 2026 में ऐसे बैक्टीरियल स्ट्रेन की पहचान की है जो पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) माइक्रोप्लास्टिक को विघटित करने की क्षमता रखते हैं। यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका माइक्रोबियल सेल फैक्ट्रीज में प्रकाशित हुआ और इसे नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में भी सूचीबद्ध किया गया है। यह खोज प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पीवीसी क्या है और इसका महत्व
पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) एक कृत्रिम बहुलक (सिंथेटिक पॉलिमर) है जिसका व्यापक उपयोग पाइप, विद्युत केबल, फर्श सामग्री, पैकेजिंग और चिकित्सा उपकरणों के निर्माण में किया जाता है। इसकी आणविक संरचना में क्लोरीन तत्व मौजूद होता है, जो इसे अन्य प्लास्टिकों से अलग बनाता है। पीवीसी दुनिया में सबसे अधिक उत्पादित थर्मोप्लास्टिक सामग्री में से एक है। हालांकि इसकी उपयोगिता बहुत अधिक है, लेकिन इसका अपशिष्ट पर्यावरण में लंबे समय तक बना रहता है और प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न करता है।
शोध में पहचाने गए बैक्टीरिया
अध्ययन में Stutzerimonas sp. NH2 नामक बैक्टीरिया को पीवीसी माइक्रोप्लास्टिक को विघटित करने में अत्यधिक प्रभावी पाया गया। प्रयोगों के दौरान इस बैक्टीरिया ने पीवीसी माइक्रोप्लास्टिक के वजन में 23 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की। इसके अलावा Glutamicibacter nicotinae NH27 नामक बैक्टीरिया ने भी प्लास्टिक विघटन गतिविधि प्रदर्शित की। जब दोनों बैक्टीरिया को एक बैक्टीरियल समूह (कंसोर्टियम) के रूप में उपयोग किया गया, तब पीवीसी के वजन में लगभग 27 प्रतिशत तक कमी देखी गई। यह परिणाम संकेत देता है कि विभिन्न सूक्ष्मजीवों का संयुक्त उपयोग प्लास्टिक अपघटन को और अधिक प्रभावी बना सकता है।
प्रयोगशाला में प्राप्त निष्कर्ष
शोधकर्ताओं ने इन बैक्टीरिया को ऐसे मिट्टी नमूनों से अलग किया जो लंबे समय से प्लास्टिक प्रदूषण से प्रभावित थे। प्रयोगों के दौरान उपचारित पीवीसी माइक्रोप्लास्टिक की सूक्ष्मदर्शी जांच में इसकी सतह पर दरारें और खांचे दिखाई दिए, जो विघटन प्रक्रिया का संकेत हैं। रासायनिक विश्लेषण में भी प्लास्टिक की संरचना और रासायनिक संकेतों में परिवर्तन दर्ज किया गया। इन निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि बैक्टीरिया वास्तव में पीवीसी की संरचना को प्रभावित कर उसे तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण में संभावित महत्व
माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, मिट्टी और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। ऐसे में प्लास्टिक को जैविक रूप से विघटित करने वाले सूक्ष्मजीवों की खोज पर्यावरणीय समाधान विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है। हालांकि यह अध्ययन अभी प्रयोगशाला स्तर तक सीमित है, फिर भी भविष्य में ऐसे बैक्टीरिया प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और जैव-उपचार तकनीकों के विकास में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PVC का पूर्ण रूप पॉलीविनाइल क्लोराइड (Polyvinyl Chloride) है।
- माइक्रोप्लास्टिक वे प्लास्टिक कण होते हैं जिनका आकार 5 मिलीमीटर से कम होता है।
- प्लास्टिक के सूक्ष्मजीवीय विघटन का अध्ययन पर्यावरणीय सूक्ष्मजीव विज्ञान और अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत किया जाता है।
- बैक्टीरियल कंसोर्टियम दो या अधिक बैक्टीरिया के समूह को कहा जाता है, जिन्हें संयुक्त रूप से प्रयोगों में उपयोग किया जाता है।
काहिरा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा की गई यह खोज प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करती है। Stutzerimonas sp. NH2 और Glutamicibacter nicotinae NH27 जैसे बैक्टीरिया की पहचान यह दर्शाती है कि प्रकृति में मौजूद सूक्ष्मजीव भविष्य में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रभावी जैविक समाधान प्रदान कर सकते हैं। यह अध्ययन पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कदम माना जा रहा है।