विश्व श्रवण दिवस 2026: ध्वनि, पर्यावरण और जागरूक सुनने का महत्व
हर वर्ष 18 जुलाई को विश्व श्रवण दिवस (World Listening Day) मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को ध्वनि, पर्यावरण और सुनने की संस्कृति के महत्व के प्रति जागरूक करना है। इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में वर्ल्ड लिसनिंग प्रोजेक्ट द्वारा की गई थी, जो वर्ष 2008 में स्थापित एक गैर-लाभकारी संस्था है। 18 जुलाई की तिथि कनाडा के प्रसिद्ध संगीतकार, लेखक और पर्यावरणविद रेमंड मरे शेफ़र के जन्मदिवस के सम्मान में चुनी गई, जिन्हें ध्वनिक पारिस्थितिकी (Acoustic Ecology) के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है।
ध्वनिक पारिस्थितिकी क्या है?
ध्वनिक पारिस्थितिकी वह अध्ययन है जिसमें मनुष्य और उसके आसपास के पर्यावरण के बीच ध्वनि के माध्यम से बनने वाले संबंधों को समझा जाता है। इस विषय में प्राकृतिक और कृत्रिम ध्वनियों, ध्वनि परिदृश्यों (साउंडस्केप), शोर प्रदूषण, सुनने की आदतों तथा पर्यावरणीय ध्वनि जागरूकता का अध्ययन किया जाता है। रेमंड मरे शेफ़र ने इस क्षेत्र को एक नई पहचान दी और यह बताया कि ध्वनियां केवल संचार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक परिवेश को भी गहराई से प्रभावित करती हैं।
विश्व श्रवण दिवस कैसे मनाया जाता है?
विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर दुनिया भर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें साउंडवॉक, फील्ड रिकॉर्डिंग, सुनने के विशेष सत्र, शैक्षणिक संगोष्ठियां तथा सामुदायिक कार्यक्रम प्रमुख हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य लोगों को अपने आसपास की ध्वनियों को ध्यानपूर्वक सुनने, शोर प्रदूषण के दुष्प्रभावों को समझने और प्राकृतिक ध्वनि वातावरण के संरक्षण के प्रति प्रेरित करना होता है। प्रत्येक वर्ष एक विशेष विषय (थीम) के माध्यम से इस दिवस का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाता है। वर्ष 2024 की प्रमुख थीम “Listening to the Weave of Time” रही, जबकि कुछ संदर्भों में “The Power of Sound” का भी उल्लेख किया गया।
सुनने की संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण
विश्व श्रवण दिवस केवल ध्वनि सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोनिक स्टेवार्डशिप (Sonic Stewardship) अर्थात सार्वजनिक और प्राकृतिक स्थानों में ध्वनि के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को भी बढ़ावा देता है। आज शिक्षा, सामुदायिक विकास, मानसिक स्वास्थ्य और उपचार कार्यक्रमों में भी सुनने की कला को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर सुनने की आदतें संवाद को प्रभावी बनाती हैं, सामाजिक संबंधों को मजबूत करती हैं और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्व श्रवण दिवस (World Listening Day) प्रत्येक वर्ष 18 जुलाई को मनाया जाता है।
- वर्ल्ड लिसनिंग प्रोजेक्ट की स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी, जबकि इस दिवस की शुरुआत 2010 में की गई।
- रेमंड मरे शेफ़र को ध्वनिक पारिस्थितिकी (Acoustic Ecology) के प्रमुख प्रवर्तकों में माना जाता है।
- ध्वनिक पारिस्थितिकी में ध्वनि, मानव जीवन, पर्यावरण, साउंडस्केप और शोर प्रदूषण के बीच संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
विश्व श्रवण दिवस हमें यह समझाने का प्रयास करता है कि सुनना केवल एक शारीरिक क्षमता नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और संस्कृति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। बढ़ते शोर प्रदूषण और बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य के बीच यह दिवस हमें ध्वनि के प्रति संवेदनशील बनने, प्राकृतिक साउंडस्केप के संरक्षण और बेहतर सामाजिक संवाद को बढ़ावा देने की प्रेरणा देता है।