वाराणसी में होगी ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक, सांस्कृतिक सहयोग पर होगा मंथन
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह (Culture Working Group – CWG) की दूसरी बैठक 4 और 5 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित की जाएगी। यह बैठक “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय के तहत आयोजित की जा रही है। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधि संस्कृति, विरासत संरक्षण, रचनात्मक अर्थव्यवस्था और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। यह बैठक सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने और सदस्य देशों के बीच साझा सांस्कृतिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
2026 में ब्रिक्स के सदस्य देश
वर्ष 2026 में ब्रिक्स एक 11 सदस्यीय अंतर-सरकारी समूह के रूप में कार्य कर रहा है। इसके सदस्य देश हैं—
- ब्राजील
- रूस
- भारत
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- इथियोपिया
- ईरान
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
- इंडोनेशिया
ब्रिक्स विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य करता है।
संस्कृति कार्य समूह की प्राथमिकताएं
वाराणसी में आयोजित होने वाली इस बैठक में संस्कृति क्षेत्र से जुड़े तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा की जाएगी—
रचनात्मक अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता
इस विषय के अंतर्गत रचनात्मक उद्योगों, कॉपीराइट संरक्षण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जाएगा। साथ ही रचनात्मक अर्थव्यवस्था में एआई के नैतिक उपयोग पर भी चर्चा होगी।
सांस्कृतिक विरासत संरक्षण
बैठक में सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा, संरक्षण और ऐतिहासिक सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी से जुड़े विषयों पर भी विचार किया जाएगा। सदस्य देश अपने अनुभव साझा करेंगे और साझा विरासत की सुरक्षा के लिए सहयोग के नए उपाय तलाशेंगे।
संस्कृति और सतत विकास
संस्कृति को सतत विकास के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा जा रहा है। चर्चा का केंद्र यह होगा कि सांस्कृतिक गतिविधियां किस प्रकार सामाजिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति में योगदान दे सकती हैं।
पांच विषयगत पैनल चर्चा
बैठक के दौरान पांच विशेष पैनल चर्चाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें प्रमुख विषय होंगे—
- रचनात्मक अर्थव्यवस्था और जन-से-जन संपर्क
- रचनात्मक उद्योगों में नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- साझा सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
- सांस्कृतिक संपदा की सुरक्षा
- सतत विकास के प्रेरक तत्व के रूप में संस्कृति
इन चर्चाओं से सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और भविष्य की नीतियों के लिए सुझाव तैयार करने में सहायता मिलेगी।
परिणाम दस्तावेज और आगामी बैठकें
वाराणसी में होने वाले विचार-विमर्श के आधार पर एक परिणाम दस्तावेज (Outcome Document) तैयार किया जाएगा। इस दस्तावेज पर आगे अगस्त 2026 में भोपाल में आयोजित होने वाली ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक में चर्चा की जाएगी। ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की पहली वर्चुअल बैठक 29 और 30 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी। इसके बाद तीसरी कार्य समूह बैठक, ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव और संस्कृति मंत्रियों की बैठक अगस्त 2026 में भोपाल में आयोजित की जाएंगी।
वाराणसी का सांस्कृतिक महत्व
वाराणसी विश्व के सबसे प्राचीन सतत आबाद शहरों में से एक माना जाता है। यह गंगा नदी, घाटों, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इसके निकट स्थित सारनाथ बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। यही कारण है कि वाराणसी को इस अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक बैठक के लिए उपयुक्त स्थल माना गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वाराणसी विश्व के सबसे प्राचीन निरंतर आबाद शहरों में से एक है।
- सारनाथ वह स्थान है जहां गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम धर्मोपदेश दिया था।
- ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के समूह के रूप में हुई थी, बाद में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ।
- संस्कृति कार्य समूह बहुपक्षीय संगठनों में मंत्री स्तरीय बैठकों के लिए प्रारंभिक मसौदे और संयुक्त घोषणापत्र तैयार करने का कार्य करते हैं।
वाराणसी में आयोजित होने वाली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की यह बैठक सांस्कृतिक सहयोग, विरासत संरक्षण और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में नए विचारों और साझेदारी को बढ़ावा देगी। भारत की अध्यक्षता में यह आयोजन ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा देने का अवसर प्रदान करेगा।