एथेनॉल एटीएम से रसोई ईंधन में बदलाव की तैयारी
भारत में रसोई ईंधन के विकल्पों को लेकर एक नई दिशा पर काम हो रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय एथेनॉल को घरेलू और व्यावसायिक खाना पकाने के लिए अधिक व्यापक रूप से इस्तेमाल करने की नीति तैयार कर रहा है। इसी योजना के तहत ‘एथेनॉल एटीएम’ जैसे डिस्पेंसिंग कियोस्क की अवधारणा सामने आई है, जिनसे उपभोक्ता कैनिस्टर में एथेनॉल खरीद सकेंगे। यह पहल अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसका मकसद ऊर्जा विकल्पों को बढ़ाना और एलपीजी पर निर्भरता घटाना है।
एथेनॉल एटीएम क्या होंगे
एथेनॉल एटीएम दरअसल ऐसे कियोस्क होंगे जो ईंधन रिटेल आउटलेट्स पर लगाए जा सकते हैं। इनसे उपभोक्ता सीलबंद कैनिस्टर में एथेनॉल ले सकेंगे। ये कैनिस्टर धातु या मोटे प्लास्टिक के हो सकते हैं और इनके साथ विशेष रूप से डिजाइन किए गए एथेनॉल स्टोव का उपयोग किया जाएगा। यानी यह व्यवस्था सामान्य गैस सिलेंडर और पारंपरिक चूल्हे की जगह एक अलग ईंधन-इकोसिस्टम पर आधारित होगी।सरकारी तेल विपणन कंपनियां एथेनॉल-आधारित कुकिंग स्टोव और पायलट कियोस्क पर शोध में शामिल हैं। पहले चरण में छोटे स्तर पर परीक्षण कर यह देखा जाएगा कि उपभोक्ता इस ईंधन को कितना अपनाते हैं और इसकी आपूर्ति-व्यवस्था कितनी व्यावहारिक रहती है।
क्यों बढ़ रही है एथेनॉल पर रुचि
एथेनॉल एक अल्कोहल-आधारित जैव ईंधन है, जो गन्ना, मक्का और अन्य बायोमास फीडस्टॉक से बनाया जाता है। भारत में इसका उपयोग पहले से पेट्रोल में मिश्रण के रूप में किया जा रहा है। अब सरकार इसके अतिरिक्त उपयोगों पर भी विचार कर रही है, ताकि देश में उपलब्ध उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सके।भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर सालाना से अधिक हो चुकी है और इसके मार्च 2027 तक 24 अरब लीटर तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में नीति-निर्माताओं के सामने यह सवाल है कि अतिरिक्त उत्पादन को किन क्षेत्रों में उपयोग किया जाए। रसोई ईंधन के रूप में एथेनॉल को एलपीजी का पूरक विकल्प माना जा रहा है, न कि उसका पूर्ण विकल्प।
शुरुआती उपयोग कहां हो सकता है
प्रस्तावित योजना के पहले चरण में बड़े उपभोक्ताओं पर ध्यान दिया जा सकता है, जैसे व्यावसायिक रसोई, रेस्तरां और स्ट्रीट फूड विक्रेता। इन क्षेत्रों में ईंधन की खपत अधिक होती है और वे समर्पित स्टोव तथा डिस्पेंसिंग ढांचे के साथ नए ईंधन को अपनाने में अपेक्षाकृत सक्षम हो सकते हैं।घरेलू उपयोग तक पहुंचने से पहले इस मॉडल को सुरक्षा, लागत, आपूर्ति और उपभोक्ता सुविधा के लिहाज से परखा जाएगा। यही कारण है कि पायलट कियोस्क को नीति का अहम परीक्षण चरण माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एथेनॉल एक नवीकरणीय जैव ईंधन है, जिसका उपयोग ईंधन मिश्रण और औद्योगिक कार्यों में होता है।
- भारत में एथेनॉल का उपयोग पहले से पेट्रोल में मिश्रण के रूप में किया जा रहा है।
- एलपीजी प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है, जिसे भारत में घरेलू खाना पकाने के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।
- भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर सालाना से अधिक हो चुकी है।
कुल मिलाकर, एथेनॉल एटीएम की अवधारणा भारत की ऊर्जा नीति में विविधीकरण की दिशा दिखाती है। यदि पायलट परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह मॉडल रसोई ईंधन के बाजार में एक नया विकल्प जोड़ सकता है और आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम करने की कोशिशों को बल दे सकता है।