मध्य प्रदेश की चट्टान ने पृथ्वी के प्राचीन इतिहास का नया सुराग दिया
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में कुटावली गांव के पास मिली पिच्छोर ऑर्बिक्युलर ग्रेनाइट चट्टान ने भूविज्ञान जगत का ध्यान खींचा है। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार यह शैल लगभग 2.56 अरब वर्ष पुरानी है और दुनिया की दूसरी सबसे प्राचीन ज्ञात ऑर्बिक्युलर चट्टान मानी जा रही है। इससे पहले ऐसी एक पुरानी संरचना पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में दर्ज की गई थी।यह खोज केवल एक दुर्लभ चट्टान की पहचान भर नहीं है, बल्कि पृथ्वी की प्रारंभिक भू-इतिहासिक प्रक्रियाओं को समझने का महत्वपूर्ण संकेत भी देती है। खास बात यह है कि यह शैल भारत के उन प्राचीन भूभागों में से एक, बुंदेलखंड क्रेटन, के भीतर पाई गई है।
ऑर्बिक्युलर ग्रेनाइट क्या होता है
ऑर्बिक्युलर ग्रेनाइट एक दुर्लभ आग्नेय शैल है, जिसमें ऑर्बिक्यूल्स नामक गोल या अंडाकार संरचनाएं पाई जाती हैं। ये संरचनाएं अक्सर क्वार्ट्ज और फेल्डस्पार जैसे खनिजों से बनी होती हैं और इनमें पेड़ के छल्लों जैसी परतें दिखाई दे सकती हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण यह चट्टान सामान्य ग्रेनाइट से अलग और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।पिच्छोर क्षेत्र की यह चट्टान इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें बने ऑर्बिक्यूल्स का आकार काफी बड़ा हो सकता है, कुछ मामलों में यह 30 सेंटीमीटर तक पहुंच सकता है।
उम्र का पता कैसे लगाया गया
वैज्ञानिकों ने इस ग्रेनाइट की आयु जानने के लिए यूरेनियम-लेड (U-Pb) जिरकॉन डेटिंग तकनीक का उपयोग किया। जिरकॉन एक ऐसा खनिज है जो अरबों वर्षों तक अपनी आइसोटोपिक जानकारी सुरक्षित रख सकता है, इसलिए बहुत प्राचीन चट्टानों की उम्र तय करने में इसका व्यापक उपयोग होता है।अध्ययन के अनुसार यह चट्टान लगभग 2.56 अरब वर्ष पहले नियोआर्कियन युग में बनी थी। नमूने में कुछ विरासत में मिले जिरकॉन क्रिस्टल भी पाए गए, जिनकी उम्र लगभग 3.5 अरब वर्ष तक आंकी गई। यह तथ्य भारतीय शील्ड के सबसे पुराने खनिज अभिलेखों में से एक की ओर संकेत करता है।
बुंदेलखंड क्रेटन और प्राचीन भूगर्भीय महत्व
यह चट्टान बुंदेलखंड क्रेटन में स्थित है, जो भारत के सबसे प्राचीन और स्थिर भूगर्भीय खंडों में गिना जाता है। क्रेटन पृथ्वी की महाद्वीपीय पपड़ी का वह हिस्सा होता है जो लंबे भूगर्भीय समय तक अपेक्षाकृत स्थिर और कम विकृत रहता है।इस ग्रेनाइट में पुराने जिरकॉन अंशों की मौजूदगी यह बताती है कि प्रारंभिक पृथ्वी के दौर में प्राचीन महाद्वीपीय पपड़ी का पुनर्चक्रण हुआ होगा। इसलिए यह खोज भारतीय शील्ड और प्रीकैम्ब्रियन भूविज्ञान के अध्ययन के लिए बेहद उपयोगी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पिच्छोर ऑर्बिक्युलर ग्रेनाइट मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में कुटावली गांव के पास मिला है।
- इसकी आयु लगभग 2.56 अरब वर्ष आंकी गई है।
- यह दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी ज्ञात ऑर्बिक्युलर चट्टान है।
- अध्ययन में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, आईआईटी कानपुर, आईआईएसईआर बेरहामपुर, यूनिवर्सिटी ऑफ कैंपिनास और जेएआईएसटी के शोधकर्ता शामिल थे।
यह शोध Geosystems and Geoenvironment पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। मध्य प्रदेश से मिली यह प्राचीन चट्टान न केवल भारत की भूवैज्ञानिक विरासत को मजबूत करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि देश के भीतर पृथ्वी के आरंभिक इतिहास से जुड़े कितने महत्वपूर्ण प्रमाण छिपे हुए हैं।