लखनऊ में गन्ना बीज केंद्र से उत्पादन और रोग-नियंत्रण को नई मजबूती
भारत में गन्ना उत्पादन की गुणवत्ता अब केवल खेत की मेहनत पर नहीं, बल्कि बीज सामग्री की शुद्धता और रोगमुक्तता पर भी उतनी ही निर्भर करती है। इसी दिशा में भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) और ICAR-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (ICAR-ISRI) ने 13 अगस्त 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत लखनऊ में उन्नत गन्ना बीज उत्पादन केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र विशेष रूप से उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र के चीनी मिलों और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा।
केंद्र की स्थापना और निवेश की रूपरेखा
यह परियोजना ICAR-ISRI परिसर, लखनऊ में स्थापित होगी और इसका कुल निवेश 80 करोड़ रुपये होगा। ISMA और ICAR-ISRI इस लागत को बराबर-बराबर साझा करेंगे, यानी दोनों पक्ष 40-40 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। लखनऊ को इस परियोजना के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यह उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख कृषि और अनुसंधान केंद्र है, जहां गन्ना आधारित अनुसंधान और उद्योग दोनों की मजबूत उपस्थिति है।
इस पहल का उद्देश्य केवल बीज उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी प्रमाणित बीज सामग्री तैयार करना है जो रोगमुक्त, आनुवंशिक रूप से शुद्ध और अधिक उपज देने वाली हो।
बीज उत्पादन में क्या-क्या सुविधाएं होंगी
प्रस्तावित केंद्र में नर्सरी तैयार करने, रोग-परिक्षण, हार्डनिंग, गुणन, भंडारण और बीज वितरण जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही डिजिटल ट्रेसबिलिटी और गुणवत्ता निगरानी प्रणाली भी लागू की जाएगी, ताकि बीज की उत्पत्ति, उसकी जांच और वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से ट्रैक किया जा सके।
गन्ने में बीज सामग्री की गुणवत्ता सीधे अंकुरण, रोग प्रसार और अंततः उत्पादन पर असर डालती है। इसलिए यह केंद्र किसानों और चीनी मिलों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
गन्ना क्षेत्र के लिए यह पहल क्यों अहम है
गन्ना भारत की एक प्रमुख वाणिज्यिक फसल है, जिसका उपयोग चीनी, गुड़, शीरा और जैव-ऊर्जा उत्पादन में होता है। ऐसे में बीज स्तर पर सुधार का असर पूरे आपूर्ति-तंत्र पर पड़ता है। रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले बीज से न केवल फसल की उत्पादकता बढ़ती है, बल्कि खेतों में रोगों के फैलाव को भी कम किया जा सकता है।
यह परियोजना ICAR-ISRI की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और ISMA के उद्योग अनुभव को एक साथ जोड़ती है। इससे अनुसंधान और उद्योग के बीच सहयोग मजबूत होगा और गन्ना क्षेत्र में तकनीक-आधारित सुधार को गति मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- गन्ना भारत की एक प्रमुख वाणिज्यिक फसल है और इसका उपयोग चीनी, गुड़, शीरा तथा जैव-ऊर्जा में होता है।
- ICAR-ISRI, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत गन्ना विज्ञान, प्रजनन और फसल सुधार पर काम करता है।
- डिजिटल ट्रेसबिलिटी प्रणाली कृषि इनपुट की उत्पत्ति, गुणवत्ता और आवाजाही को ट्रैक करने में मदद करती है।
- लखनऊ में बनने वाला यह केंद्र उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र की चीनी मिलों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा।
लखनऊ में प्रस्तावित यह केंद्र गन्ना बीज व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और उत्पादक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे अन्य गन्ना क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।