स्वतंत्रता दिवस पर मोदी का ‘सप्त धारा’ रोडमैप, विकसित भारत 2047 की दिशा तय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से दिए गए 80वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘सप्त धारा’ या ‘शक्ति की सप्तधारा’ ढांचा पेश किया। इसका उद्देश्य भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को सात प्रमुख विकास धाराओं में संगठित करना है। इस रूपरेखा में उद्योग, कृषि, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, रक्षा, ऊर्जा और भारत की सॉफ्ट पावर को राष्ट्रीय प्रगति के अलग-अलग लेकिन परस्पर जुड़े स्तंभों के रूप में रखा गया है।
सात धाराओं में विकास का नया खाका
‘सप्त धारा’ ढांचे में विनिर्माण, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी और नवाचार, गति शक्ति, रक्षा में आत्मनिर्भरता, हरित और नीली अर्थव्यवस्था तथा भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं। यह मॉडल इस सोच पर आधारित है कि आर्थिक विकास केवल उत्पादन बढ़ाने से नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, तकनीक, समुद्री संसाधनों और वैश्विक प्रभाव को साथ लेकर आगे बढ़ता है।
विनिर्माण क्षेत्र में लागत, गुणवत्ता और पैमाने पर जोर दिया गया है। औद्योगिक नीति में ये तीनों तत्व प्रतिस्पर्धा, मानक और उत्पादन क्षमता के प्रमुख संकेतक माने जाते हैं। कृषि और खाद्य प्रसंस्करण को शामिल करने का अर्थ है कि खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जाए।
तकनीक, गति शक्ति और रक्षा आत्मनिर्भरता पर जोर
प्रौद्योगिकी और नवाचार वाले हिस्से में अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रशिक्षण का मिशन-आधारित लक्ष्य रखा गया है। एआई आज मशीनों को सीखने, पैटर्न पहचानने और भाषा संसाधन जैसे कार्यों में सक्षम बनाती है, इसलिए इसे भविष्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
‘गति शक्ति’ को ढांचे में विशेष स्थान मिला है। यह परिवहन, लॉजिस्टिक्स और अवसंरचना परियोजनाओं के लिए एकीकृत योजना और समन्वय की पद्धति है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अर्थ घरेलू स्तर पर सैन्य उपकरण, प्लेटफॉर्म और प्रणालियों के निर्माण को बढ़ावा देना है, जिससे रणनीतिक मजबूती और आयात निर्भरता में कमी आती है।
ऊर्जा, हरित-नीली अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर की भूमिका
ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है। परमाणु ऊर्जा नियंत्रित विखंडन प्रक्रिया से उत्पन्न होती है और देश में भारी जल रिएक्टरों के साथ आयातित लाइट वॉटर रिएक्टर तकनीक का भी उपयोग होता है। अगले छह से सात वर्षों में पांच नए परमाणु रिएक्टरों के चालू होने की योजना है।
हरित अर्थव्यवस्था कम-कार्बन विकास से जुड़ी है, जबकि नीली अर्थव्यवस्था समुद्री और महासागरीय संसाधनों के सतत उपयोग पर केंद्रित है। इसमें मत्स्य, बंदरगाह, शिपिंग और समुद्री ऊर्जा जैसे क्षेत्र आते हैं। सॉफ्ट पावर को भी सात धाराओं में शामिल किया गया है, जो संस्कृति, मूल्यों, शिक्षा और कूटनीति के माध्यम से देश के प्रभाव को दर्शाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाता है और मुख्य समारोह लाल किले, नई दिल्ली में होता है।
- ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने से जुड़ा है, जो स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ का वर्ष है।
- ‘गति शक्ति’ परिवहन, लॉजिस्टिक्स और अवसंरचना परियोजनाओं के एकीकृत नियोजन से संबंधित है।
- नीली अर्थव्यवस्था समुद्री संसाधनों, बंदरगाहों, शिपिंग और समुद्री ऊर्जा के सतत उपयोग पर आधारित होती है।
कुल मिलाकर, ‘सप्त धारा’ ढांचा भारत की विकास यात्रा को एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि में पिरोने का प्रयास है। इसमें उत्पादन, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और वैश्विक प्रभाव—सभी को 2047 के विकसित भारत लक्ष्य से जोड़ा गया है।