जनगणना 2027 में जाति और डिजिटल पहचान पर बड़ा फोकस

जनगणना 2027 में जाति और डिजिटल पहचान पर बड़ा फोकस

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के जनसंख्या गणना चरण के लिए 40 प्रश्नों वाला शेड्यूल अधिसूचित कर दिया है। इस बार प्रश्नावली में पारंपरिक जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारियों के साथ पहचान से जुड़े विवरण भी शामिल किए गए हैं। खास बात यह है कि यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें कई क्षेत्रों में कागज की जगह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा दर्ज किया जाएगा।

जनगणना 2027 की रूपरेखा

जनगणना का संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत होता है। इसके लिए भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त को वैधानिक अधिकार प्राप्त हैं, जो प्रश्नावली तैयार करने से लेकर गणनाकारों के प्रशिक्षण और परिणामों के संकलन तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। 2027 की जनगणना को प्रशासनिक दृष्टि से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश की जनसंख्या, आवास, शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अद्यतन चित्र मिलेगा।

पहला चरण, यानी हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना, 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है। इसके बाद जनसंख्या गणना का चरण अलग-अलग क्षेत्रों में निर्धारित समय पर कराया जाएगा।

जाति गणना और नई प्रश्नावली की खासियत

नए शेड्यूल में प्रश्न संख्या 10 को “Scheduled Caste (SC)/Scheduled Tribe (ST)/Caste” के लिए खुला प्रविष्टि क्षेत्र रखा गया है। यह स्वतंत्र भारत में सभी समुदायों की पहली व्यापक जाति गणना मानी जा रही है। सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को कैबिनेट समिति की राजनीतिक मामलों की बैठक में व्यापक जाति गणना को मंजूरी दी थी, जिसके बाद यह बदलाव किया गया।

प्रश्नावली में केवल जाति ही नहीं, बल्कि डिजिटल साक्षरता की स्थिति, बैंक खातों की कुल संख्या और कोविड-19 टीकाकरण कहाँ कराया गया जैसी जानकारियाँ भी शामिल हैं। इससे जनगणना केवल जनसंख्या गिनती तक सीमित न रहकर सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल का व्यापक आधार तैयार करेगी।

पहचान, क्षेत्रीय कवरेज और महत्व

इस बार शेड्यूल में पहचान से जुड़े विवरण भी पूछे जाएंगे, जैसे आधार नंबर, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट नंबर, जहां यह लागू हो। हालांकि जनगणना में इनका उपयोग मुख्यतः पहचान और डेटा मिलान के संदर्भ में होगा।

जनसंख्या गणना चरण 17 अगस्त 2026 से लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के बर्फीले क्षेत्रों में शुरू होगा। शेष भारत में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 में कराई जाएगी। पूरे देश और सभी केंद्र शासित प्रदेशों में एक मानकीकृत प्रश्नावली के जरिए घरों और व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत की जनगणना जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत कराई जाती है।
  • रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त जनगणना संचालन की वैधानिक संस्था हैं।
  • जनगणना 2027 को भारत की पहली डिजिटल जनगणना कहा जा रहा है।
  • प्रश्न 10 में “Scheduled Caste (SC)/Scheduled Tribe (ST)/Caste” के लिए खुला प्रविष्टि क्षेत्र रखा गया है।

जनगणना 2027 से देश की सामाजिक संरचना, आवासीय स्थिति और कल्याणकारी योजनाओं के लिए जरूरी आधारभूत आंकड़े मिलेंगे। जाति गणना और डिजिटल डेटा संग्रह के कारण यह अभ्यास प्रशासनिक और नीतिगत दोनों स्तरों पर खास महत्व रखता है।

Originally written on August 14, 2026 and last modified on August 14, 2026.

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