कर्नाटक की सैंड्या किरण योजना से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कैशलेस इलाज का सहारा

कर्नाटक की सैंड्या किरण योजना से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कैशलेस इलाज का सहारा

कर्नाटक सरकार ने सेवानिवृत्त राज्य सरकारी कर्मचारियों, परिवार पेंशनरों और उनके पात्र आश्रितों के लिए सैंड्या किरण नाम से एक अंशदायी कैशलेस स्वास्थ्य योजना को मंजूरी दी है। 70 वर्ष से कम आयु वर्ग के लाभार्थियों के लिए यह योजना सालाना प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराएगी। इसमें द्वितीयक, तृतीयक और आपातकालीन उपचार शामिल होंगे, बशर्ते इलाज निर्धारित अस्पतालों में कराया जाए।

योजना का ढांचा और किसे मिलेगा लाभ

सैंड्या किरण योजना कर्नाटक के आयुष्मान भारत-अरोग्य कर्नाटक (AB-ArK) ढांचे के तहत लागू की जाएगी। इसका संचालन राज्य की सुvarna आरोग्य सुरक्षा ट्रस्ट करेगी। योजना का लाभ सेवा पेंशनरों, परिवार पेंशनरों और अधिसूचित श्रेणी व आयु सीमा के भीतर आने वाले पात्र आश्रितों को मिलेगा।

इस योजना की सबसे अहम विशेषता इसका फ्लोटर बेसिस है। इसका अर्थ है कि 5 लाख रुपये की कुल सीमा परिवार के किसी भी पात्र सदस्य पर उपयोग की जा सकती है। यानी एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्य जरूरत के अनुसार इस सीमा का लाभ ले सकेंगे।

अंशदान, लागत और वित्तीय सुरक्षा

यह पूरी तरह मुफ्त कल्याण योजना नहीं है, बल्कि अंशदायी मॉडल पर आधारित है। सेवा पेंशनरों को अपनी मूल पेंशन का 1.25 प्रतिशत योगदान देना होगा, जबकि परिवार पेंशनरों को अपनी मूल पारिवारिक पेंशन का 0.75 प्रतिशत अंशदान करना होगा। सरकार के अनुसार, इस योजना से सालाना लगभग 117 करोड़ रुपये का प्रीमियम संग्रह होने का अनुमान है, जबकि उपचार लागत करीब 81.75 करोड़ रुपये आंकी गई है।

लागत साझा करने के ढांचे में लगभग 70 प्रतिशत बोझ लाभार्थियों पर और करीब 30 प्रतिशत बोझ राज्य सरकार पर आएगा। लाभार्थियों की हिस्सेदारी लगभग 57.22 करोड़ रुपये और राज्य की हिस्सेदारी लगभग 24.53 करोड़ रुपये अनुमानित है। योजना की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एक वित्तीय सुरक्षा प्रावधान भी जोड़ा गया है। यदि कोष का उपयोग 85 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तो अंशदान दरों में पांच बेसिस प्वाइंट की वृद्धि की जाएगी।

स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से क्यों अहम है यह कदम

सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में इलाज का खर्च अक्सर बड़ी चिंता बन जाता है। कैशलेस सुविधा होने से अस्पताल में भर्ती के समय तत्काल भुगतान की परेशानी कम होती है और परिवार को आर्थिक दबाव से राहत मिलती है।

द्वितीयक और तृतीयक उपचार की कवरेज इस योजना को सामान्य ओपीडी सहायता से आगे ले जाती है। ऐसे मामलों में अस्पताल आधारित इलाज, विशेषज्ञ परामर्श, सर्जरी और आपात चिकित्सा जैसी सेवाएं अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं। निर्धारित अस्पतालों के माध्यम से सीधे बिल निपटान की व्यवस्था योजना को व्यावहारिक बनाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आयुष्मान भारत-अरोग्य कर्नाटक कर्नाटक की राज्य-स्तरीय स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था है, जिसके तहत कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाती है।
  • फ्लोटर हेल्थ कवर में परिवार की कुल बीमा/कवरेज राशि किसी एक सदस्य या कई सदस्यों द्वारा साझा की जा सकती है।
  • द्वितीयक उपचार में सामान्य अस्पताल सेवाएं और विशेषज्ञ देखभाल आती है, जबकि तृतीयक उपचार में जटिल और उन्नत चिकित्सा शामिल होती है।
  • कैशलेस इलाज योजनाओं में आमतौर पर केवल सूचीबद्ध या निर्धारित अस्पतालों में ही सीधे भुगतान की सुविधा मिलती है।

कुल मिलाकर, सैंड्या किरण योजना कर्नाटक में पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का एक नया सहारा बनकर सामने आई है। अंशदान आधारित यह मॉडल सरकारी सहायता और लाभार्थी भागीदारी के बीच संतुलन बनाते हुए इलाज को अधिक सुलभ बनाने की कोशिश करता है।

Originally written on August 14, 2026 and last modified on August 14, 2026.

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